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कान्हा टाइगर रिजर्व में 9 बाघों की मौत से उत्तराखंड में अलर्ट, कैनाइन डिस्टेंपर से बचाएगा वन विभाग

Published: Mon, 19 Oct 2026 10:54 PM (IST)

कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से बाघों की मौत के बाद उत्तराखंड में अलर्ट जारी किया गया ...और पढ़ें

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. उत्तराखंड में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस को लेकर अलर्ट।

  2. कान्हा में 9 बाघों की मौत के बाद बढ़ी चिंता।

  3. पालतू व आवारा कुत्तों के टीकाकरण पर जोर।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) के संक्रमण से बाघों की मौत के मामले सामने आने के बाद उत्तराखंड भी चौकन्ना हो गया है। यद्यपि, राज्य में अभी तक सीडीवी के संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन वन विभाग ने ऐहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

इसी कड़ी में कार्बेट व राजाजी टाइगर रिजर्व समेत सभी संरक्षित व आरक्षित क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। साथ ही संरक्षित व आरक्षित वन क्षेत्रों से लगे गांवों, कस्बों में पालतू व आवारा कुत्तों के टीकाकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस सिलसिले में पशुपालन विभाग से समन्वय किया जा रहा है।

कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस बाघों के लिए चुनौती बना हुआ है। मुक्की परिक्षेत्र स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में भर्ती एक मादा बाघ शावक की रविवार को मौत हो गई। इसकी वजह सीडीवी संक्रमण बताई गई है। वहां इस संक्रमण से मरने वाला यह नवां बाघ है।

ऐसे में बाघों की संख्या के लिहाज से देश में तीसरे स्थान पर काबिज राज्य उत्तराखंड का चिंतित होना स्वाभाविक है। इसे देखते हुए राज्य की सीमा के साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में खास चौकसी बरती जा रही है। पिछली गणना के अनुसार राज्य में 560 बाघ और 3115 गुलदार हैं।यही नहीं, आए दिन बाघ व गुलदारों द्वारा कुत्तों को शिकार बनाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

क्या है सीडीवी

सीडीवी एक संक्रामक बीमारी है। पालतू व आवारा कुत्ते इसके प्रमुख स्रोत हैं। कुत्तों का शिकार करने पर यह बाघ, गुलदार व अन्य मांसाहारी जानवरों में फैल सकता है। इससे पीड़ित जानवर को तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी होने के साथ ही उसका तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो सकता है।

राज्य में सीडीवी के संक्रमण का कोई मामला नहीं है, लेकिन ऐहतियातन सतर्कता बरती जा रही है। पशुपालन विभाग को पत्र लिखा गया है कि सभी संरक्षित व आरक्षित क्षेत्रो से लगे गांवों और कस्बों में पालतू व आवारा कुत्तों का टीकाकरण कराने को प्रभावी कदम उठाए जाएं। -नीना ग्रेवाल, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक।