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स्थानीय हुनर को वैश्विक बाजार: उत्तराखंड में 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' से संवर रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रुक रहा पलायन

Published: Thu, 17 Sep 2026 05:31 PM (IST)

उत्तराखंड में 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) और 'वन डिस्ट्रिक्ट टू प्रोडक्ट्स' (ODTP) योजनाएं स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाकर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. ODOP योजना से स्थानीय उत्पादों को मिली वैश्विक पहचान।

  2. कारीगरों और किसानों की आय में हुई उल्लेखनीय वृद्धि।

  3. पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने में मिली सफलता।

डिजिटल टीम, देहरादून। 'देवभूमि' उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय अंचलों में छिपी प्राकृतिक संपदा और पारंपरिक हुनर को नई पहचान देने के लिए पुष्कर सिंह धामी सरकार की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) और 'वन डिस्ट्रिक्ट टू प्रोडक्ट्स' (ODTP) योजनाएं वरदान साबित हो रही हैं। राज्य के सभी 13 जिलों में स्थानीय उत्पादों की पहचान कर उन्हें आधुनिक तकनीक, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ा गया है। 
 
इस पहल ने न केवल सीमांत जिलों के पारंपरिक कारीगरों और किसानों की आय में बहुगुणित वृद्धि की है, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन पर अंकुश लगाकर 'रिवर्स पलायन' का एक मजबूत आधार भी तैयार किया है।

जिलों की किस्मत बदल रहे हैं स्थानीय उत्पाद

ODOP योजना के तहत उत्तराखंड के हर जिले की agro-climatic परिस्थितियों और पारंपरिक शिल्प के अनुसार उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। 
  • चंपावत (हिमालयन शहद): जैविक और औषधीय गुणों से भरपूर शहद उत्पादन के लिए क्लस्टर बनाकर किसानों की आय तीन गुना बढ़ाई गई है।
  • उत्तरकाशी (ऐप्पल व रेड राइस): सेब और उत्तरकाशी के प्रसिद्ध लाल चावल को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रीमियम मूल्य मिल रहा है।
  • पिथौरागढ़ (ऊनी उत्पाद व मुनस्यारी राजमा): सीमांत क्षेत्र के हथकरघा बुनकरों और महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार ऊनी वस्त्रों व राजमा की मांग तेजी से बढ़ी है।
  • देहरादून (बेकरी उत्पाद व मशरूम): बेकरी उद्योगों और मशरूम क्लस्टर से युवाओं को बड़े पैमाने पर स्थानीय रोजगार मिला है।
  • अल्मोड़ा (बाल मिठाई व ताम्र शिल्प): पारंपरिक बाल मिठाई और प्रसिद्ध ताम्र नगरी के तांबे के बर्तनों को व्यवस्थित ब्रांडिंग दी गई है।
  • हरिद्वार (गुड़ उत्पाद) व चमोली (बिछुआ घास/नेटल फाइबर उत्पाद): कृषि आधारित प्रसंस्करण के माध्यम से कुटीर उद्योगों को नई जान मिली है।

धामी सरकार के नीतिगत कदम और सब्सिडी

राज्य सरकार ने स्थानीय उत्पादों को 'लोकल फॉर ग्लोबल' बनाने के लिए बहुस्तरीय रणनीति लागू की है। राज्य के सभी जैविक और स्थानीय उत्पादों को एक ही वैश्विक अम्ब्रेला ब्रांड 'House of Himalayas' के तहत बाजार में उतारा गया है।
 
पीएमएफएमई (PMFME) और राज्य योजनाओं के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC), प्रोसेसिंग यूनिट, आधुनिक पैकेजिंग लैब और टूलकिट पर 50% से 80% तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है।

उत्पादों को ONDC, अमेजन, फ्लिपकार्ट और राज्य के सरस आउटलेट्स के माध्यम से देश-विदेश के ग्राहकों तक सीधे उपलब्ध कराया जा रहा है।

उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों की वैश्विक पहचान और आजीविका संवर्धन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर Local' और 'आत्मानिभर भारत' के संकल्प को साकार करने में उत्तराखंड की ODOP नीति महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हमारी सरकार हर जिले के अद्वितीय हुनर और प्राकृतिक उपज को वैज्ञानिक प्रसंस्करण, विश्वस्तरीय ब्रांडिंग और डिजिटल बाजार से जोड़ रही है। राज्य के हमारे किसान, हस्तशिल्पी और मातृशक्ति अब केवल उत्पादक नहीं, बल्कि सफल उद्यमी बन रहे हैं। यह योजना पहाड़ों में स्वरोजगार और रिवर्स पलायन का मुख्य स्तंभ बन चुकी है।
  • रतन सिंह रावत (सेब व रेड राइस उत्पादक, उत्तरकाशी)

    "पहले बिचौलियों के कारण हमें अपनी लाल चावल की फसल और सेब का सही मूल्य नहीं मिल पाता था। ODOP योजना से जुड़ने के बाद हमें ग्रेडिंग और प्रॉपर पैकेजिंग का प्रशिक्षण मिला। अब 'हाउस ऑफ हिमालयाज' ब्रांड के माध्यम से हमारा लाल चावल बड़े शहरों में महंगे दामों पर बिक रहा है। हमारे पूरे गांव के युवाओं को अब खेती में भविष्य दिख रहा है।"
  • मंजू देवी (महिला हस्तशिल्प समूह, पिथौरागढ़)

    "हमारा समूह पारंपरिक रूप से कालीन और ऊनी वस्त्र तैयार करता था, लेकिन सही बाजार नहीं था। सरकार द्वारा आधुनिक चरखे, सब्सिडी पर कच्चा माल और प्रदर्शनियों में स्टॉल मिलने से हमारी बिक्री चार गुना बढ़ गई है। आज हमारे समूह की 15 से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे पा रही हैं।"

आर्थिक विकास और दूरगामी प्रभाव

ODOP योजना ने राज्य में कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर छोटे कारीगरों की लागत को कम किया है। जिला स्तर पर उद्योग केंद्रों (DIC) के माध्यम से मिले सहयोग से हजारों परिवारों को उनके गृह क्षेत्र में ही सम्मानजनक आजीविका मिल रही है, जिससे उत्तराखंड समृद्ध और स्वावलंबी बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है।