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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 29, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उत्तराखंड: मृत्युंजय मिश्रा आयुर्वेद विवि के कुलसचिव पद पर बहाल, जानें किस मामले को लेकर थे विवादों में

By Raksha PanthriEdited By:
Published: Wed, 29 Dec 2021 11:57 AM (IST)

मृत्युंजय कुमार मिश्रा का निलंबन समाप्त कर उन्हें उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद पर बहाल कर दिया है। साथ ...और पढ़ें

उत्तराखंड: मृत्युंजय मिश्रा आयुर्वेद विवि के कुलसचिव पद पर बहाल।
उत्तराखंड: मृत्युंजय मिश्रा आयुर्वेद विवि के कुलसचिव पद पर बहाल।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। सरकार ने डा मृत्युंजय कुमार मिश्रा का निलंबन समाप्त कर उन्हें उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद पर बहाल कर दिया है। साथ ही डा. मिश्रा को निलंबन अवधि का वेतन भुगतान नियमानुसार करने के आदेश भी दिए गए हैं। आयुष शिक्षा सचिव चंद्रेश कुमार ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया।

आदेश में बताया गया कि डा मिश्रा के खिलाफ 25 जुलाई, 2018 से जारी सतर्कता जांच के क्रम में विभागीय स्तर पर जांच अधिकारी की नियुक्ति और विभागीय अनुशासनिक जांच कराने को शासन ने औचित्यपूर्ण नहीं पाया है। डा. मिश्रा का निलंबन इस प्रतिबंध के साथ समाप्त किया गया है कि सतर्कता विभाग की जांच रिपोर्ट प्रशासनिक विभाग को प्राप्त होने पर गुण दोष के आधार पर यथोचित कार्यवाही की जाएगी। मृत्युंजय मिश्रा को 27 अक्टूबर, 2018 को कुलसचिव पद से निलंबित कर आयुष शिक्षा सचिव कार्यालय से संबद्ध किया गया था। तीन दिसंबर, 2018 को मिश्रा को गिरफ्तार कर जिला कारागार में भेजा गया था।

उधर, आयुष शिक्षा सचिव ने अलग आदेश जारी कर आयुर्वेद विश्वविद्यालय में ही कुलसचिव पद पर अस्थायी रूप से तैनात किए गए डा राजेश कुमार अदाना को उप कुलसचिव का प्रभार दिया गया है। नियमित उप कुलसचिव की तैनाती तक यह प्रभार सौंपा गया है। डा राजेश कुमार को इस प्रभार के लिए अलग से वेतन-भत्ते देय नहीं होंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

मुख्यमंत्री से की मुलाकात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उत्तराखंड आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र जुगरान ने मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने सरकारी सेवाओं में उत्तराखंड आंदोलनकारियों को दिए जा रहे 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का मसला रखा। उन्होंने इसे फिर से बहाल करने का अनुरोध किया। इस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि यह मसला जल्द कैबिनेट के सम्मुख लाया जाएगा।

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