राज्य ब्यूरो, देहरादून: प्रदेश में अब विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए सभी स्कूली बस व वैन में जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) लगाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर वाहनों पर लगातार निगरानी रखना है। वाहनों पर जीपीएस लगाने के बाद इन पर परिवहन विभाग में इसके लिए पहले से ही बने कंट्रोल रूम से नजर रखी जाएगी। जीपीएस लगाने से यह पता चल सकेगा कि स्कूल बस व वैन किस मार्ग पर हैं और इन्हें आने-जाने में कितना समय लग रहा है।

प्रदेश में इस समय पांच हजार से अधिक स्कूली बस और लगभग इतनी ही संख्या में वैन संचालित हो रही हैं। स्कूली बस व वैन भले ही व्यावसायिक वाहन हैं, लेकिन इन्हें टैक्स में छूट दी जाती है। देखने में आया है कि कई बार स्कूली बस व वैन अपने मार्ग से इतर भी चलने लगती हैं। कई बार इनका प्रयोग स्कूल के अलावा व्यावसायिक रूप में भी किया जाता है। विशेषकर छुट्टियों के दौरान इनका इस्तेमाल पर्यटकों को सेवा देने के लिए किया जाता है।

पूर्व में देश के विभिन्न हिस्सों में स्कूली बस व वैन में विद्याॢथयों के साथ दुव्र्यवहार की घटनाएं सामने आई हैं। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गठित सड़क सुरक्षा समिति ने इन वाहनों पर नजर रखने के लिए जीपीएस लगाने के निर्देश दिए थे। यह कवायद वर्ष 2019 में शुरू की जानी थी। उत्तराखंड में परिवहन विभाग ने इसके लिए तैयारी भी की।

इस बीच मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण के कारण लगे लाकडाउन में वाहनों का संचालन ठप हो गया। तकरीबन दो साल तक अधिकांश स्कूल व कालेजों में आनलाइन कक्षाएं संचालित हुईं। अब सभी स्कूल व कालेज खुल चुके हैं और इस समय प्रदेश में गर्मियों की छुट्टियां भी होने वाली है। अब स्कूली बस व वैन का दो माह तक कम इस्तेमाल होगा।

यह समय इन वाहनों पर जीपीएस लगाने के लिए सबसे उपयुक्त है। इसे देखते हुए परिवहन विभाग इनमें जीपीएस लगाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार जिन वाहनों में जीपीएस लगाया जाएगा, उन्हें परिवहन विभाग के साफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा। जरूरत पडऩे पर स्कूलों को भी इस सर्वर का लिंक दिया जाएगा ताकि वे भी वाहनों की सही स्थिति पर नजर रख सकें।

Edited By: Nirmala Bohra