राज्य ब्यूरो, देहरादून। मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्यमों यानी एमएसएमई से जुड़कर कृषि सेक्टर प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। नीति आयोग से मिले इस सुझाव पर प्रदेश सरकार शिद्दत से काम करने पर मंथन कर रही है। इससे आजीविका के नए संसाधन भी बढ़ाए जा सकेंगे।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने अपनी टीम के साथ बीते दिनों उत्तराखंड का दौरा किया था। इस दौरान उनकी ओर से कई महत्वपूर्ण सुझाव राज्य सरकार को दिए गए। प्रदेश में सामने इस वक्त दो बड़ी समस्याएं हैं। रोजगार के अवसर बढ़ाने की चुनौती के साथ पलायन की समस्या के समाधान को लेकर आयोग के सुझाव पर सरकार मंथन में जुट गई है। दरअसल राज्य में कृषि और इससे संबंधित क्षेत्रों में रोजगार की काफी संभावनाएं हैं। बशर्ते इसे नियोजित और व्यवस्थित तरीके से अंजाम देने की आवश्यकता है।

कृषि क्षेत्र को एमएसएमई से जोड़े जाने से इसमें पूंजी निवेश की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है। साथ ही खेती और इससे जुड़े व्यवसायों को एमएसएमई के लाभ देकर प्रोत्साहित किया जा सकेगा। पलायन रोकने को दिए अहम सुझाव नीति आयोग ने पलायन को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर क्लस्टर बनाकर गांवों के पुनर्वास व रोजगार सृजन पर जोर दिया है। राज्य में फसल चक्र, प्राकृतिक खेती, उपजाऊ भूमि, फल और फूल और औषधीय पौधों को बढ़ावा देने का अहम सुझाव दिया है। इसके बूते रोजगार के अवसर तो बढ़ेंगे ही, साथ में पलायन को भी रोका जा सकता है।

सी बकथार्न के उत्पादन को बढ़ावा देने को कहा गया है। इसके माध्यम से भोजन, दवाइयों और सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुओं को राज्य में तैयार किया जा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी। आयोग के सुझावों पर अमल करेगी सरकार नियोजन सचिव डा बीवीआरसी पुरुषोत्तम का कहना है कि नीति आयोग ने महत्वपूर्ण सुझावों पर राज्य सरकार अमल करेगी।

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इसके लिए विभिन्न स्तर पर मंथन चल रहा है। कृषि व इससे जुड़े क्षेत्र में विकास की बड़ी संभावनाएं हैं। इन्हें लेकर सरकार गंभीर है। राज्य के विभिन्न जिलों में कोआपरेटिव और कंपेरेटिव पैटर्न पर काम करने की शैली को अपनाने के आयोग के सुझाव पर भी सरकार गौर करेगी।

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Edited By: Raksha Panthri