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उत्तराखंड नीट-यूजी काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों से एमबीबीएस सीट हथियाने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

Published: Sat, 10 Oct 2026 10:27 PM (IST)

नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने उत्तराखंड नीट-यूजी काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड में नीट-यूजी काउंसलिंग 2026 के दौरान स्थायी निवास और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों के कथित दुरुपयोग का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने जनहित याचिका दायर कर राज्य गठन से अब तक जारी ऐसे प्रमाणपत्रों और उनके इस्तेमाल की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) से जांच कराने की मांग की है।

याचिका के अनुसार, स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के 24 अभ्यर्थियों में से 16 के प्रमाणपत्रों के सत्यापन में गड़बड़ियां सामने आईं। इनमें आवेदन का विवरण नहीं मिलना, अभ्यर्थी के नाम और आवेदन में अंतर तथा प्रमाणपत्रों की श्रेणी में विसंगतियां शामिल हैं।

याचिकाकर्ता ने प्रथम चरण के 195 और दूसरे चरण के 329 रिकॉर्ड समेत कुल 524 काउंसलिंग प्रविष्टियों की जांच की मांग की है। इनमें उत्तराखंड का मूल निवास होने का दावा करने वाले ऐसे अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड भी शामिल हैं, जिनकी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई राज्य से बाहर हुई।

याचिका में सितंबर 2026 में दर्ज तीन प्राथमिकी और राजस्व निरीक्षक की शिकायत का हवाला देते हुए प्रमाणपत्र जारी करने से लेकर सत्यापन और प्रवेश तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।

इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार तस्वीर के कथित इस्तेमाल और एमबीबीएस सीट के बदले करीब 45 लाख रुपये की व्यवस्था संबंधी मीडिया रिपोर्टों का भी उल्लेख है। याचिकाकर्ता ने विश्वविद्यालय की ओर से सत्यापन के बाद 20 अभ्यर्थियों का अनंतिम सीट आवंटन निरस्त किए जाने का दावा भी किया है।

साथ ही सरकारी अभिलेख और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है। याचिका में राज्य सरकार के गृह, चिकित्सा शिक्षा, राजस्व तथा कार्मिक विभागों के सचिवों, पुलिस महानिदेशक, सीबीआइ निदेशक, देहरादून के जिलाधिकारी और चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।

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