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उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का किया गठन, मदरसा बोर्ड एक जुलाई 2026 को होगा खत्म

Published: Tue, 03 Feb 2026 09:37 PM (IST)

उत्तराखंड सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है, जिसकी कमान सेवानिवृत्त प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी को सौंपी गई ...और पढ़ें

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

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संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, जागरण देहरादून। उत्तराखंड में संचालित अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अब एक छतरी के नीचे आ जाएंगे। इस सिलसिले में सरकार ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत प्राधिकरण का गठन कर दिया है। बीएसएम पीजी कालेज रुड़की के सेवानिवृत्त प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी को इसकी कमान सौंपी गई है।

अब राज्य में मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन व पारसी समुदायों द्वारा स्थापित शैक्षिक संस्थान इस प्राधिकरण के दायरे में आएंगे। एक जुलाई 2026 को उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड का अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। इसके बाद बोर्ड से संचालित हो रहे मदरसे प्राधिकरण के दायरे में आ जाएंगे।

धामी सरकार पिछले वर्ष अगस्त में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लेकर आई थी। दरअसल, राज्य में अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान का दर्जा केवल मुस्लिम समुदाय को ही मिलता था।

इसे देखते हुए मुस्लिम समेत सभी अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक संस्थानों को मान्यता प्रदान करने को पारदर्शी प्रक्रिया और शिक्षा में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य यह अधिनियम लाया गया।

इसके तहत अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक संस्थानों को एक छतरी के नीचे लाने को प्राधिकरण गठित हुआ है।

प्राधिकरण की अधिसूचना जारी

शासन ने मंगलवार को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन की अधिसूचना जारी की। इसमें बीएमएस पीजी कालेज रुड़की के सेवानिवृत्त प्रोफेसर गांधी अध्यक्ष और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक सदस्य सचिव होंगे।

सदस्यों में कुमाऊं विवि के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डा सैयद अली हमीद, केजीके पीजी कालेज मुरादाबाद के प्रोफेसर गुरमीत सिंह, राजकीय महाविद्यालय कपकोट के सहायक प्राध्यापक डा एल्बा मन्ड्रेले, सोबन सिंह जीना विवि के प्रोफेसर रोबिना अमन, सेवानिवृत्त आइएएस चंद्रशेखर भट्ट, चमोली के प्रोफेसर पेमा तेनजिन, हिमालय ग्राम विकास समिति गंगोलीहाट के राजेंद्र सिंह बिष्ट हैं।

पदेन सदस्यों में महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा व एससीईआरटी के निदेशक शामिल होंगे।

सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के साथ ही मदरसा शिक्षा बोर्ड खत्म करने का निर्णय लिया था। अब प्राधिकरण गठित कर दिया गया है, जो तय करेगा कि अल्पसंख्यक बच्चों को कैसी शिक्षा दी जाएगी। प्राधिकरण इसके लिए पाठ्यक्रम करेगा। सभी अल्पसंख्यक संस्थाएं उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेंगी।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

खास बातें

  • मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन व पारसी समुदाय द्वारा स्थापित शैक्षिक संस्थान को प्राधिकरण से लेनी होगी मान्यता।
  • प्राधिकरण इन संस्थानों की स्थापना व संचालन में हस्तक्षेप नहीं करेगा, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा।
  • मान्यता के लिए शैक्षिक संस्थान का सोसाइटी, ट्रस्ट या कंपनी एक्ट में पंजीकरण जरूरी। उसके नाम होंगी भूमि, बैंक खाते एवं अन्य संपत्तियां।
  • वित्तीय गड़बड़ी, पारदर्शिता की कमी अथवा धार्मिक एवं सामाजिक सद्भावना विरुद्ध गतिविधियों की स्थिति में वापस ली जाएगी मान्यता।
  • प्राधिकरण सुनिश्चित करेगा कि इन संस्थानों में उत्तराखंड बोर्ड के मानकों के अनुरूप शिक्षा दी जाए।

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