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उत्तराखंड में खनन से रिकॉर्ड 1217 करोड़ की कमाई, अब फिर से खुलेगा खनन का खजाना, 1500 करोड़ का लक्ष्य

Published: Tue, 15 Sep 2026 09:23 PM (IST)

उत्तराखंड में वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन से रिकॉर्ड 1217 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। एक अक्टूबर से खनन ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई से बनाई गई है

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राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। मानसून के बाद एक अक्टूबर से प्रदेश में खनन गतिविधियां रफ्तार पकड़ने वाली हैं और इसके साथ ही सरकार के सामने पिछले दो वर्षों में बने राजस्व के रिकार्ड को बरकरार रखने की चुनौती होगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन विभाग ने 1217 करोड़ रुपये का अब तक का सर्वाधिक राजस्व अर्जित किया है।

इससे पहले वर्ष 2024-25 में भी विभाग ने लक्ष्य से अधिक 1041 करोड़ रुपये की कमाई की थी। अभी 1500 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में नदियों में खनिज निकासी शुरू होने के बाद राजस्व का सिलसिला जारी रखना विभाग के लिए अहम होगा।

प्रदेश में खनन विभाग अधिक राजस्व देने वाले विभागों में शामिल हैं। सरकार ने गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन विभाग के लिए 950 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया था, जबकि विभाग ने इसके सापेक्ष 1217 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया।

इसमें कोषागार में 1130 करोड़, जिला खनिज फाउंडेशन न्यास में 80 करोड़ और राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट के तहत सात करोड़ रुपये शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 875 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1041 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई थी।

आंकड़े बताते हैं कि राज्य में खनन राजस्व में बीते वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2012-13 में जहां खनन से करीब 110 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1217 करोड़ रुपये पहुंच गया।

तकनीक से निगरानी पर जोर

सरकार ने खनन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है। माइनिंग डिजिटल ट्रांसफार्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम के तहत देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल में 45 ई-चेक गेट स्थापित किए गए हैं।

इनमें स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरे और रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान तकनीक से वाहनों की निगरानी की जा रही है। खनिज प्रबंधन प्रणाली, ई-रवन्ना, माइनिंग ई-सर्विस, निगरानी एवं प्रवर्तन प्रणाली तथा निर्णय सहायता प्रणाली के माध्यम से खनन गतिविधियों का डिजिटल अभिलेख और निगरानी की जा रही है। ई-रवन्ना में सुरक्षा सुविधाओं को भी जोड़ा गया है।

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