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दिव्यांग युवाओं के सपनों को लगेंगे नए पंख, उत्तराखंड में शुरू हुई 'मुफ्त सिविल सेवा कोचिंग योजना'

Published: Fri, 16 Oct 2026 06:11 PM (IST)

उत्तराखंड सरकार ने दिव्यांगजनों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए 'निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग योजना' शुरू की है। यह ...और पढ़ें

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HighLights

  1. दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग योजना शुरू।

  2. देहरादून, हल्द्वानी में आवासीय/गैर-आवासीय कोचिंग केंद्र।

  3. यूपीएससी, यूकेपीएससी तैयारी हेतु विशेष सुविधाएँ उपलब्ध।

डिजिटल टीम, देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में दिव्यांगजनों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश के प्रतिभावान दिव्यांग युवाओं को देश और राज्य की शीर्ष प्रशासनिक सेवाओं में स्थान दिलाने के लिए 'निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग योजना' की औपचारिक शुरुआत की गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान करना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनके सिविल सेवक बनने के सपनों को साकार करना है।

इस योजना के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की राज्य प्रशासनिक परीक्षाओं के लिए पूरी तरह से मुफ़्त आवासीय व गैर-आवासीय कोचिंग दी जाएगी।

शुरुआत में इस विशेष कोचिंग सेवा को प्रदेश के दो प्रमुख शहरों में स्थापित केंद्रों के माध्यम से शुरू किया गया है। 

देहरादून: गढ़वाल मंडल के अभ्यर्थियों की सुविधा और पहुंच के लिए।
हल्द्वानी (नैनीताल): कुमाऊं मंडल के दिव्यांग अभ्यर्थियों को ध्यान में रखते हुए।
 
ये दोनों केंद्र परिवहन के साधनों से सीधे जुड़े हैं ताकि राज्य के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले अभ्यर्थियों को आवागमन में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

मिलेगी हर सुविधा

दिव्यांग अभ्यर्थियों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कोचिंग केंद्रों में सर्वसुविधायुक्त वातावरण तैयार किया गया है। 

निःशुल्क अध्ययन सामग्री: दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए ब्रेल लिपि में किताबें, स्क्रीन-रीडर फ्रेंडली डिजिटल कंटेंट और ऑडियो लेक्चर्स की विशेष व्यवस्था की गई है।

अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: कोचिंग सेंटर पूरी तरह से सुविधाओं से लैस हैं, जिनमें रैंप, लिफ्ट, विशेष शौचालय और व्हीलचेयर-फ्रेंडली सीटें उपलब्ध हैं।

आवासीय सुविधा और स्टाइपेंड: दूर-दराज़ के क्षेत्रों से आने वाले पात्र अभ्यर्थियों के लिए मुफ्त हॉस्टल (आवास) और भोजन की व्यवस्था की गई है। गैर-आवासीय अभ्यर्थियों को मासिक परिवहन भत्ता भी दिया जाएगा।

सहायक उपकरण और मॉक टेस्ट: विशेष डिजिटल टैबलेट्स, कंप्यूटर लैब, नियमित मॉक टेस्ट और व्यक्तिगत परामर्श की सुविधा।

 

किस तरह के शिक्षक देंगे सेवाएं?

कोचिंग की गुणवत्ता को उच्च स्तरीय बनाए रखने के लिए देश और राज्य के ख्यातिलब्ध विषय विशेषज्ञों को जोड़ा गया है। 

सेवानिवृत्त व सेवारत अधिकारी: पूर्व आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS), और राज्य सिविल सेवा (PCS) के अधिकारी अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन और इंटरव्यू गाइडेंस देंगे।

विषय विशेषज्ञ: प्रतिष्ठित राष्ट्रीय कोचिंग संस्थानों के अनुभवी शिक्षक भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, अर्थव्यवस्था, भूगोल और करेंट अफेयर्स जैसे विषयों की गहन तैयारी कराएंगे।

विशेष शिक्षक: मूक-बधिर अभ्यर्थियों के लिए सांकेतिक भाषा (Sign Language) के जानकार सह-शिक्षकों की भी नियुक्ति की गई है।
 

योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता

योजना में पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। अभ्यर्थी उत्तराखंड का स्थायी/मूल निवासी होना अनिवार्य है। अभ्यर्थी के पास कम से कम 40% या उससे अधिक की प्रमाणित दिव्यांगता होनी चाहिए। यूपीएससी या यूकेपीएससी की पात्रता के अनुसार अभ्यर्थी किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में होना चाहिए। परिवार की वार्षिक आय राज्य सरकार द्वारा निर्धारित गरीबी रेखा व अन्य श्रेणीगत मानकों के भीतर होनी चाहिए।

सपनों को मिला नया हौसला

"दृष्टिबाधित होने के कारण सिविल सेवा की तैयारी के लिए महंगी कोचिंग और अध्ययन सामग्री जुटाना मेरे लिए असंभव था। देहरादून में शुरू हुई इस मुफ़्त कोचिंग से मुझे ब्रेल व ऑडियो स्टडी मटीरियल के साथ-साथ बेहतरीन फैकल्टी का मार्गदर्शन मिल रहा है। अब मेरा आईएएस बनने का सपना हकीकत में बदलता दिख रहा है। - अमित नेगी (लाभार्थी अभ्यर्थी, चमोली)

"पहाड़ी क्षेत्रों में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए अवसर सीमित होते हैं। हल्द्वानी सेंटर पर जो सुविधाएं (रैंप, हॉस्टल और टेस्ट सीरीज) मिली हैं, वे अद्भुत हैं। सरकार की इस संवेदनशील पहल से हम जैसे अभ्यर्थियों का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया है।" - पूजा जोशी (लाभार्थी अभ्यर्थी, अल्मोड़ा)

 

दिव्यांगजनों के कल्याण और योजना के बारे में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार दिव्यांगजनों को स्वावलंबी बनाने और उनके सपनों को नए पंख देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए मुफ़्त सिविल सेवा कोचिंग की शुरुआत एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल है। यह योजना हमारे दिव्यांग युवाओं को समान अवसर प्रदान करेगी और उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी। हमारा दृढ़ संकल्प है कि राज्य के हर दिव्यांग युवा को उसकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने, शिक्षा प्राप्त करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के पूरे अवसर मिलें।