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'इन्वेस्ट उत्तराखंड': धामी सरकार की नीतियों से बढ़ा निवेश, युवाओं को मिल रहे रोजगार के नए अवसर

Published: Mon, 19 Oct 2026 06:52 PM (IST)

उत्तराखंड उद्योग-अनुकूल नीतियों और पारदर्शी प्रशासन के कारण एक प्रमुख औद्योगिक गंतव्य बन गया है, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश ...और पढ़ें

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HighLights

  1. उद्योग-अनुकूल नीतियों से उत्तराखंड बना प्रमुख औद्योगिक गंतव्य।

  2. निवेशकों को मिल रही सब्सिडी, ऋण और सिंगल विंडो क्लीयरेंस।

  3. 4.70 लाख से अधिक रोजगार सृजित, पलायन पर अंकुश।

डिजिटल टीम, देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड अब केवल धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के सबसे पसंदीदा औद्योगिक गंतव्यों में से एक बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार द्वारा लागू की गई उद्योग-अनुकूल नीतियों, पारदर्शी प्रशासनिक तंत्र और बुनियादी ढांचे के विस्तार के चलते उत्तराखंड में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशक बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश कर रहे हैं।

निवेशकों को आकर्षित करने से लेकर उद्योगों की स्थापना और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने तक, उत्तराखंड में औद्योगिक विकास का एक नया युग देखने को मिल रहा है।

उद्योग लगाने के लिए मिल रहा फंड

उत्तराखंड में नए उद्योग और स्टार्टअप शुरू करने के लिए वित्तीय संसाधनों की कोई कमी नहीं है। 

केंद्रीय योजनाएं: पीएम रोजगार सृजन कार्यक्रम और केंद्रीय एमएसएमई योजनाओं के तहत 15% से 35% तक सब्सिडी और लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। 

राज्य सरकार की नीतियां: 'उत्तराखंड एमएसएमई नीति' और 'औद्योगिक विकास नीति' के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योग लगाने पर 40% तक कैपिटल सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट और ब्याज में राहत दी जा रही है।

बैंक और सिडबी: राष्ट्रीयकृत बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सिडबी के माध्यम से उद्यमियों को रियायती ब्याज दरों पर आसान लोन दिए जा रहे हैं। 

निजी व विदेशी निवेश: 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' के माध्यम से देश-विदेश की बड़ी कंपनियों ने राज्य में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और निजी पूंजी लगाई है।
 

राज्य के औद्योगिक विकास पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार उत्तराखंड को देश का अग्रणी और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य में अनुकूल औद्योगिक माहौल तैयार कर निवेश आकर्षित किया जा रहा है। हमारी नीतियों का मुख्य उद्देश्य केवल उद्योग लगाना नहीं, बल्कि राज्य के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर देना और स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग करना है। पारदर्शी नीतियों और सरल प्रक्रियाओं के बल पर आज उत्तराखंड निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है, जिससे हमारे देवभूमि के युवाओं के स्वर्णिम भविष्य का निर्माण हो रहा है।

सरकार कर रही पूरी मदद

धामी सरकार ने राज्य में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को धरातल पर उतारने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।
सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम: उद्योग लगाने के लिए सभी प्रकार की सरकारी मंजूरियां अब एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से समयबद्ध तरीके से मिल जाती हैं।

लैंड बैंक और इंडस्ट्रियल पार्क: हरिद्वार, उधमसिंह नगर, पंतनगर और सिडकुल (SIDCUL) क्षेत्रों में आधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस लैंड बैंक विकसित किए गए हैं।

लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी: ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और पंतनगर व जौलीग्रांट हवाई अड्डों के विस्तार से माल ढुलाई और आवागमन सुगम हुआ है।
 
उत्तराखंड के प्राकृतिक और पर्वतीय वातावरण को देखते हुए यहां विभिन्न प्रकार के उद्योगों का तेजी से विस्तार हो रहा है। 

फूड प्रोसेसिंग व आर्गेनिक एग्री: पहाड़ी फलों (सेब, माल्टा), मशरूम और आर्गेनिक खाद्यान्न के प्रसंस्करण की इकाइयां। 
फार्मा व आयुष: हरिद्वार और देहरादून देश के प्रमुख 'फार्मा हब' और वैलनेस/हर्बल उत्पाद निर्माण केंद्र बन चुके हैं।
इको-टूरिज्म व होमस्टे: पर्वतीय क्षेत्रों में हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन से जुड़े उद्योग।
ड्रोन और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी: राज्य को देश का 'ड्रोन हब' बनाने के लिए नई तकनीक आधारित इकाइयां स्थापित हो रही हैं।

बढ़ रहा रोजगार

उद्योगों की स्थापना का सबसे बड़ा और सकारात्मक प्रभाव राज्य के नागरिकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

पलायन पर अंकुश: अब तक 96,000 से अधिक एमएसएमई इकाइयों के माध्यम से राज्य में 4.70 लाख से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिला है, जिससे पहाड़ों से होने वाला पलायन रुका है।
घर के पास रोजगार: युवाओं को दिल्ली या मुंबई जाने के बजाय देहरादून, हरिद्वार, पंतनगर और अपने गृह जनपदों में ही सम्मानजनक नौकरियां मिल रही हैं।
महिला सशक्तिकरण: फ़ूड पैकेजिंग, हस्तशिल्प और टेक्सटाइल सेक्टर में स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भागीदारी बढ़ी है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।