जागरण संवाददाता, देहरादून: उत्तराखंडवासियों को त्योहार पर बिजली कटौती से कुछ राहत मिली है। रामनवमी पर मांग और उपलब्धता के बीच का अंतर घटा और प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में बिजली कटौती न के बराबर की गई। पिछले एक सप्ताह में यह पहला मौका है, जब प्रदेश में बिजली की कमी 10 लाख यूनिट से कम रही। केंद्रीय पूल से 23 लाख यूनिट की खरीद कर ऊर्जा निगम ने इस अंतर को पाटने का प्रयास किया।

देश में उपजे कोयला संकट के चलते उत्तराखंड में भी बिजली का आंशिक संकट पैदा हो गया था। हालांकि, गुरुवार को हालात काफी हद तक काबू में रहे। शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में कोई कटौती नहीं की गई। जबकि, ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ देर जरूर बत्ती गुल रही। ऊर्जा निगम ने गढ़वाल के ग्रामीण क्षेत्रों में एक घंटे की कटौती की। जबकि, कुमाऊं में भी आधा घंटा बिजली नहीं रही। बीते रोज यह कटौती पांच घंटे थी और औद्योगिक क्षेत्रों में भी कटौती की गई थी। गुरुवार को मांग और उपलब्धता के बीच 31 लाख यूनिट की कमी रही। जबकि, ऊर्जा निगम ने केंद्रीय पूल से 23 लाख यूनिट बिजली खरीदी। ऐसे में प्रदेश में करीब आठ लाख यूनिट बिजली कम रही। जिसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती की गई। इससे पहले प्रदेश में कुछ दिनों से लगातार 20 से 40 लाख यूनिट तक बिजली की किल्लत बनी हुई थी।

ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता संचालन गौरव शर्मा ने बताया कि केंद्र से तीन रुपये 94 पैसे की दर से 23 लाख यूनिट बिजली खरीदी गई। विजयादशमी पर भी आपूर्ति सामान्य रहने की उम्मीद है। केंद्रीय पूल से आवश्यकता के सापेक्ष बिजली खरीद की जा रही है। गुरुवार को प्रदेश में बिजली की मांग चार करोड़ यूनिट रही।

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जल विद्युत परियोजनाओं से उत्पादन में लगातार गिरावट

देहरादून: उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएन) की परियोजनाओं से लगातार विद्युत उत्पादन घट रहा है। हालांकि, इसका एक मात्र कारण नदियों का डिस्चार्ज घटना है, जो कि सदियों में सामान्य होता है। आने वाले दिनों में इसमें और गिरावट आने की आशंका है। यूजेवीएन की कुल 17 परियोजनाओं से फिलहाल केवल 17 से 18 मिलियन यूनिट बिजली प्राप्त हो रही है। एक सप्ताह पूर्व यह 20 मिलियन यूनिट के करीब थी। दरअसल, गर्मियों में नदियों का जल स्तर बढऩे पर उत्पादन में खासा इजाफा हो जाता है। ऐसे में यूजेवीएन की परियोजनाओं से 30 मिलियन यूनिट तक बिजली उत्पादन होता है। मानसून सीजन में गाद आने के कारण टरबाइन थम जाने से उत्पादन गिरता है और सामान्यत: यह 22 से 25 मिलियन यूनिट हो जाता है। इसके बाद अक्टूबर से उत्पादन में गिरावट शुरू होती है, जो कि दिसंबर-जनवरी में सात से आठ मिलियन यूनिट तक पहुंच जाती है। यूजेवीएन के प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल के अनुसार, सभी परियोजनाओं से क्षमता के अनुसार उत्पादन किया जा रहा है। केवल कुछ परियोजनाओं में रेनोवेशन, अपग्रेडेशन आदि कार्र्यों की वजह से कुछ यूनिट में उत्पादन प्रभावित है।

यह हैं यूजेवीएन की परियोजना

छिबरो (240 मेगावाट), खेदरी (120 मेगावाट), ढकरानी (33.75 मेगावाट), ढालीपुर (51 मेगावाट), कुल्हाल (30 मेगावाट), मनेरी भाली-1 (90 मेगावाट), मनेरी भाली-2 (304 मेगावाट), चीला (144 मेगावाट), रामगंगा (198 मेगावाट), खटीमा (41.40 मेगावाट), पथरी (20.40 मेगावाट), मोहम्मदपुर (9.30 मेगावाट), गलोगी (3.50 मेगावाट), दुनाऊ (1.5 मेगावाट), पिलंग गाड़ (2.25 मेगावाट), उर्गम (3.00 मेगावाट), कालीगंगा (4.00 मेगावाट)

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Edited By: Sumit Kumar