उत्तराखंड चुनाव 2027: जीत या हार की हैट्रिक पर दांव, भाजपा-कांग्रेस की अग्निपरीक्षा
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा जीत की हैट्रिक लगाने का लक्ष्य बना रही है, जबकि कांग्रेस हार की हैट्रिक रोकने की कोशिश में है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी. File Photo

समय कम है?
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रविंद्र बड़थ्वाल, देहरादून। उत्तराखंड में अगला विधानसभा चुनाव यह तय करेगा कि जीत की हैट्रिक लगेगी या हार की हैट्रिक थमेगी। सतह पर चाहे जो भी नजर आए, लेकिन वर्ष 2027 के चुनावी रण में दांव पर दोनों दलों के केंद्रीय नेतृत्व का रणनीतिक कौशल और प्रदेश नेतृत्व की युद्धक क्षमता ही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं मैदान में मोर्चा संभाल चुके हैं।
पांचवें व अंतिम वर्ष में मंत्रिमंडल में रिक्त पांच सीटें भरने में भी क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने की सत्ताधारी दल की रणनीति से कांग्रेस के खेमे में हलचल देखी जा रही है।
जवाब में कांग्रेस ने भी सप्ताहभर बाद ही दो पूर्व विधायकों समेत प्रदेश के जिन छह नेताओं को नई दिल्ली में पार्टी में सम्मिलित कराया, उसमें अनुसूचित जाति समेत कोर वोट बैंक को जोड़े रखने की खासतौर पर मशक्कत की गई। यद्यपि, इस कवायद में पार्टी का अंतर्कलह सतह पर आ गया है।
मुख्यमंत्री धामी ने संभाला मोर्चा
जीत या हार की हैट्रिक के केंद्र में आने से विधानसभा का चुनावी महासमर सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए अग्नि परीक्षा बन गया है। चुनावी तैयारी में भाजपा फिलहाल बढ़त लिए हुए दिखती है तो उसका बड़ा कारण कमजोरियों को पहचानने और उन्हें दूर करने की पार्टी की रणनीति ही है।
विपक्षियों खासतौर पर कांग्रेस के हर दांव को बारीकी से भांपकर काट ढूंढ़ने की वर्षों की मेहनत से हासिल की गई कुव्वत, अब उसकी ताकत के रूप में सामने है।
भर्ती घोटाले से लेकर विभागीय स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता के मामले हों या कानून व्यवस्था को लेकर उठती अंगुली, इन सबमें कार्रवाई को लेकर हिचक नहीं दिखाने के पीछे एंटी इनकंबेंसी को प्रो इनकंबेंसी में बदलने की रणनीति रही है। मुख्यमंत्री जनसंपर्क से लेकर छोटी-छोटी जनसभाओं को लेकर आम जन से संवाद के माध्यम से माहौल बनाने से लेकर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने में ताकत झोंक रहे हैं।
कांग्रेस के सामने अंतर्कलह थामने की चुनौती
दूसरी ओर, लगभग 10 वर्ष की अवधि में एक अदद जीत के लिए तरस गई कांग्रेस सांगठनिक स्तर पर कील-कांटे दुरुस्त कर रही है। पार्टी ने हाल ही में नेताओं को सम्मिलित कर मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने की रणनीति जिलेवार विधानसभा सीटों को साधने के गणित को ध्यान में रखकर खींचा। यह अलग बात है कि इन नेताओं के सम्मिलित होने के बाद पार्टी में गुटीय खींचतान सामने आ गई।
नई दिल्ली में हुए इस कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दूरी बनाए रखी। हरीश रावत रामनगर क्षेत्र से एक निर्दल को सम्मिलित कराने के इच्छुक थे, लेकिन पार्टी में अंतर्विरोध के कारण उनकी यह इच्छा अधूरी रह गई। अब वह नाराज बताए जा रहे हैं। अंतर्कलह का असाध्य रोग कांग्रेस के लिए, विशेष तौर पर चुनाव के मौके पर चिंता का बड़ा विषय बन जाता है।
