यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 11, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Uttarakhand Election Result 2022 : देश की आजादी के बाद पहली बार देहरादून में चुनी गई महिला विधायक, पढ़ें कौन हैं सविता कपूर
Uttarakhand Election Result 2022 देहरादून का चुनावी इतिहास बताता है कि वर्ष 1952 से शुरू हुई विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, देहरादून। Uttarakhand Election Result 2022 : उत्तराखंड चुनावों के तहत देहरादून जनपद में इस विधानसभा चुनाव में एक नया रिकार्ड बना है। देश की आजादी के बाद जिले में पहली बार कोई महिला विधायक बनी हैं। कैंट विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी व पूर्व विधायक स्वर्गीय हरबंस कपूर की पत्नी सविता कपूर के नाम यह रिकार्ड दर्ज हुआ है।
अब तक यहां कोई महिला विधायक नहीं चुनी गई थी
देहरादून का चुनावी इतिहास बताता है कि वर्ष 1952 से शुरू हुई विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया के बाद से अब तक यहां कोई भी महिला विधायक नहीं चुनी गई थी। जबकि गांव की प्रधान से लेकर नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम, राज्यसभा व लोकसभा में महिलाएं प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
जिले के अंतर्गत आने वाली चकराता, विकासनगर, सहसपुर, कैंट, राजपुर व मसूरी विधानसभा सीटें टिहरी संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है। जिसका प्रतिनिधित्व मौजूदा समय में सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह कर रही हैं। वहीं, कांग्रेस की दिवंगत नेत्री मनोरमा डोबरियाल शर्मा राज्यसभा सदस्य रह चुकी हैं। इससे पहले वह दो बार देहरादून नगर निगम की महापौर भी रही थीं। वहीं, मधु चौहान जिला पंचायत अध्यक्ष और अनीता ममगाईं ऋषिकेश की महापौर हैं।
100 वार्डों वाले देहरादून नगर निगम में भी वर्तमान में 30 से अधिक महिला पार्षद हैं। यही नहीं, आधे से अधिक गांवों में महिलाएं प्रधान भी हैं। अब इस कड़ी में महिला विधायक का नाम भी जुड़ गया है। राज्य गठन के बाद हुए विस चुनाव में भी हर बार किसी न किसी सीट से महिला उम्मीदवार मैदान में उतरी, पर हर बार उन्हें हार का ही सामना करना पड़ा।
वर्ष 2007 के विस चुनाव में भी चकराता विस सीट से बतौर निर्दलीय मैदान में उतरीं मधु चौहान विधानसभा पहुंचने से चूक गई थीं। 2012 के विस चुनाव में भी कोई महिला विधायक नहीं बनी। वर्ष 2017 के चुनाव में चकराता सीट से भाजपा ने मधु चौहान को कांग्रेस प्रत्याशी प्रीतम सिंह के विरुद्ध मैदान में उतारा, पर इस बार भी वह हार गई।
इसी तरह मसूरी सीट पर भाजपा के प्रत्याशी गणेश जोशी के मुकाबले मैदान में उतरी कांग्रेस प्रत्याशी गोदावरी थापली को भी हार का सामना करना पड़ा था। इस बार लगातार दूसरी बार उन्हें शिकस्त झेलनी पड़ी है। महिला प्रत्याशियों को बार-बार मिलने वाली हार के इस तिलिस्म को आखिर इस बार भाजपा प्रत्याशी सविता कपूर ने मिटा दिया है।
1936 में शर्मदा त्यागी जीती थीं चुनाव
मोंटेगू-थैम्सफोर्ड सुधारों के तहत वर्ष 1920 में प्रांतीय लेजिस्लेटिव काउंसिल का गठन हुआ था। तब पूरे देहरादून जिले में एक ही सीट थी। वर्ष 1936 में हुए प्रांतीय कौंसिल के चुनाव में कांग्रेस पार्टी की शर्मदा त्यागी की जीत हुई थी। उन्होंने रामचंद्र कुकरेती को पराजित किया था।
1977 में उतरी थी पहली महिला
वर्ष 1952 से 2022 तक दून में 76 महिला प्रत्याशी विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। जिले में वर्ष 1977 में पहली मर्तबा किसी महिला ने चुनावी मैदान में उतरने का साहस दिखाया था। तब निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर राजकुमारी ने चुनाव लड$ा, मगर वह हार गई थीं।
कैंट में कपूर परिवार पर कायम रहा जनता का विश्वास
देहरादून कैंट सीट के जिस गढ़ को दिवंगत विधायक हरबंस कपूर ने जीते जी अविजित रखा, उनके जाने के बाद भी उसे कोई भेद न सका। हरबंस कपूर की विरासत को बचाने की जो जिम्मेदारी उनकी पत्नी सविता को मिली थी, वह उस कसौटी पर खरी उतरीं हैं। जनता ने भी कपूर परिवार पर भरोसा कायम रखा और सविता को बंपर वोट से जीत दिला दी।
