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भाजपा का मिशन 2027: नवरात्र से चुनावी शंखनाद, हर बूथ पर अलग बिसात

Published: Fri, 09 Oct 2026 01:13 PM (GMT+05:30)

भाजपा नवरात्र से मिशन-2027 के लिए बूथों पर चुनावी शंखनाद कर रही है, जिसकी शुरुआत काशीपुर में कार्यशाला से होगी। ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

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अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। प्रदेश संगठन को दुरस्त करने के बाद भाजपा नवरात्र से मिशन-2027 के लिए बूथों पर चुनावी शंखनाद करने जा रही है। यह चुनावी रणभेरी भाजपा मुख्यालय से बजेगी, लेकिन जीत की पटकथा का केंद्र बूथ होंगे।

पार्टी ने इस बार राज्य की 70 विधानसभा सीटों में एक ही रणनीति अपनाने के बजाय प्रत्येक बूथ के लिए अलग-अलग ब्लूप्रिंट तैयार किया है, 13 और 14 अक्टूबर को काशीपुर में होने वाली कार्यशाला से इस माइक्रो मैनेजमेंट की शुरुआत होगी।

इसके लिए विधानसभा क्षेत्रवार विस्तारकों व प्रभारियों की सूची तैयार कर ली गई है। काशीपुर में कार्यशाला के बाद विस्तारक संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में पूर्णकालिक सक्रिय होंगे।

उनका काम केवल संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक बूथ का चुनावी आकलन करना होगा, किस बूथ पर भाजपा की बढ़त मजबूत है, कहां पिछली बार जीत का अंतर बेहद कम रहा, कहां हार का अंतर पाटने की गुंजाइश है और किन बूथों पर संगठन कागज पर मजबूत लेकिन जमीन पर कमजोर है, इसकी पूरी रिपोर्ट संगठन को देनी होगी। यही इस बार की नई रणनीति है।

भाजपा ने विधानसभा सीट जीतने के लिए प्रत्येक बूथ को जीतने का प्लान तैयार किया है। किसी बूथ पर चुनौती जातीय-सामाजिक समीकरण हो सकती है तो किसी पर स्थानीय मुद्दा। कहीं युवा मतदाता निर्णायक हो सकते हैं तो कहीं महिला मतदाताओं का रुख।

पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, रोजगार, पलायन और बुनियादी सुविधाएं मुद्दा बन सकती हैं, जबकि मैदानी बूथों पर शहरी सुविधाएं, रोजगार, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की पहुंच अधिक प्रभावी हो सकती है। प्रत्येक बूथ को मुद्दों के अनुसार जीतने का प्लान तैयार किया गया है।

शक्ति केंद्रों से निगरानी होगी आसान

भाजपा में पहले मंडल चुनावी प्रबंधन की मुख्य इकाई था। एक मंडल के अंतर्गत कई बूथ होने से हर बूथ की निगरानी चुनौतीपूर्ण होती थी, अब शक्ति केंद्रों से चुनाव प्रबंधन करने की योजना बनाई गई है। एक शक्ति केंद्र में करीब पांच-छह बूथ आते हैं। कम बूथ होने से हर बूथ पर पहुंच व जमीनी निगरानी आसान होगी।

युवा और महिला बाहुल्य बूथों का अलग प्लान

युवा और महिला मतदाताओं को भी बूथवार रणनीति में अलग महत्व देने की तैयारी है। युवा बाहुल्य वाले बूथों पर रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल और डिजिटल संवाद को केंद्र में रखा जाएगा, जबकि महिला मतदाताओं की अधिकता वाले बूथों में स्वास्थ्य, सुरक्षा, आजीविका और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पहुंच बढ़ाने पर जोर होगा।