राज्य ब्यूरो, देहरादून। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि देश भर के छोटे राज्यों में विधान परिषद का कोई उदाहरण नहीं है। उत्तराखंड में विधान परिषद बनाए जाने की बात कहना औचित्यहीन और जनता के पैसे की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत ने बीते रोज उत्तराखंड में विधान परिषद की पैरवी की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में विधान परिषद का गठन करना औचित्यहीन है। उन्होंने कहा कि वह पूर्व मुख्यमंत्री को बताना चाहते हैं कि उन्हीं के पार्टी के नेता और वर्ष 2002 में उत्तराखंड कांग्रेस के चुनाव प्रभारी रहे सुरेश पचौरी ने 2002 में कहा था कि यह व्यवस्था छोटे राज्य के लिए नहीं है। उन्होंने इस विषय को चुनाव घोषणा पत्र में भी शामिल करने से इन्कार कर दिया था। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के साथ ही छत्तीसगढ़, झारखंड और देश के अन्य किसी भी छोटे राज्य में विधान परिषद नहीं है। आंध्र प्रदेश ने अपने यहां विधान परिषद को समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया है। उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में विधानसभा के गठन की बात कहना सरासर बेमानी है।

मसूरी टनल का शिलान्यास दिसंबर के प्रथम सप्ताह में करने का अनुरोध

सैनिक कल्याण एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर मसूरी टनल के निर्माण कार्य का शिलान्यास दिसंबर के प्रथम सप्ताह में करने का अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को इसी अवधि में टनल के शिलान्यास का आश्वासन दिया। केंद्र सरकार ने हाल ही में 9.60 किमी लंबी मसूरी टनल निर्माण परियोजना को मंजूरी दी है।

इस परियोजना में 4.5 किमी लंबी सुरंग बनाई जाएगी। इसकी लागत अभी 837 करोड़ रुपये आंकी गई है। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय मंत्री को टनल परियोजना के लिए आभार जताते हुए कहा कि यह परियोजना मसूरी तथा उत्तराखंड में पर्यटन विकास की संभावनाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगी। यह उपहार न केवल मसूरी, बल्कि उत्तरकाशी के निवासियों के लिए भी संभावनाओं के नए द्वार खोलेगा।

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Edited By: Raksha Panthri