यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 16, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तराखंड राज्य गठन से शुरू हुआ उधार का सिलसिला आज भी है जारी, कर्ज का मर्ज बढ़कर हुआ 80 हजार करोड़
Uttarakhand Budget 2023 उत्तराखंड पर कर्ज का मर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात यह हो गए हैं कि कर्ज ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, देहरादूनः प्रदेश पर कर्ज का मर्ज बढ़ता जा रहा है। बीते साल की अपेक्षा कर्ज के ग्राफ़ में अब तक तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। हालांकि, इस वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार ने 1700 करोड़ रुपये की कर्ज अदायगी भी की है।
सीमित संसाधनों वाला प्रदेश
उत्तराखंड सीमित संसाधनों वाला प्रदेश है। इसके साथ ही आय बढ़ाने वाले विकल्पों पर भी ठोस काम नहीं हो पाया। इसके चलते सरकार वेतन व अन्य मदों में खर्च के लिए कर्ज लेती रहती है। कर्ज लेने का जो सिलसिला राज्य गठन के समय से शुरू हुआ था, वह कम होने के बजाय निरंतर बढ़ता चला गया।
80 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज
आज हालात यह हो गए हैं कि कर्ज बढ़ते-बढ़ते 80 हजार करोड़ रुपये को पार कर गया है। पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 77.23 हजार करोड़ रुपये था। वित्त सचिव दिलीप जावलकर के मुताबिक, प्रदेश की जरूरतों की पूर्ति के लिए पूर्व में 10 हजार करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया था।
3 हजार करोड़ के कर्ज की जरूरत प्रदेश को
हालांकि, समय के साथ इतनी जरूरत महसूस न होने पर आठ हजार करोड़ की ही जरूरत महसूस हुई। इसमें से भी तीन हजार करोड़ रुपये के ही कर्ज की जरूरत अब तक प्रदेश को हुई। इसके अलावा 1700 करोड़ रुपये की कर्ज/ब्याज अदायगी भी की है। इस तरह अब तक कर्ज की स्थिति 80 हजार करोड़ रुपये के करीब सिमटी हुई है। यदि इस वित्तीय वर्ष के समाप्ति तक राज्य एक हजार करोड़ और भी कर्ज लेता है तो कर्ज की स्थिति पर खास असर नहीं पड़ेगा।
कर्ज के साथ ब्याज पड़ रहा राज्य पर भारी
कैग की पिछली रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य पर कर्ज के साथ ब्याज अदायगी भारी पड़ रही है। अनुमान के मुताबिक प्रदेश को वर्ष 2025 तक कर्ज और उसके ब्याज के रूप में औसतन 4499.82 करोड़ रुपये का सालाना भुगतान करना पड़ेगा। यह भी एक बड़ा कारण है कि नियमित रूप से कर्ज में कुछ न कुछ भुगतान किए जाने के बाद भी आंकड़ा कम नहीं हो रहा है।
