उत्तराखंड विधानसभा में बड़ा फैसला: अल्पसंख्यक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा पर रोक, उल्लंघन पर 20 हजार रुपये जुर्माना
उत्तराखंड विधानसभा सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए, जिनमें अल्पसंख्यक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा पर प्रतिबंध और छोटे ...और पढ़ें


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राज्य ब्यूरो, गैरसैंण। उत्तराखंड में अल्पसंख्यक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकेगी। यदि किसी संस्थान में जांच के उपरांत धार्मिक शिक्षा देने की पुष्टि होती है तो ऐसे मामलों में संबंधित संस्थान में तालाबंदी के साथ ही उसके संचालक से पांच लाख रुपये तक का अर्थदंड वसूला जाएगा। साथ ही वहां रिसीवर की नियुक्ति भी की जा सकती है।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत होने वाली इस कार्रवाई से पहले ऐसे संस्थान संचालकों को राहत देते हुए सरकार ने उन्हें सुनवाई का अवसर देने का निश्चय किया है।
सरकार की ओर इस सिलसिले में विधानसभा सत्र के पहले दिन उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में संशोधन विधेयक पेश किया। यह भी प्रविधान प्रस्तावित किया गया है कि कक्षा आठ तक की शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थान सक्षम प्राधिकारी से मान्यता लेंगे, जबकि कक्षा नौ से 12 तक की शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थान विद्यालयी शिक्षा परिषद से मान्यता लेंगे।
छोटे अपराधों में कम जेल, ज्यादा जुर्माना
प्रदेश में अब में छोटे अपराधों पर जेल की सजा घटेगी, जबकि जुर्माना राशि बढ़ेगी। सरकार ने इस सिलसिले में उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम से संबंधित पांच अधिनियमों में बदलाव के लिए संशोधन विधेयक सदन में पेश किया है। इसके तहत उत्तराखंड मत्स्य अधिनियम, 2003 में संशोधन कर विषाक्त पदार्थों से मछलियों को नुकसान पहुंचाने पर अधिकतम जेल तीन वर्ष से घटाकर दो माह और जुर्माना 20 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है। अन्य उल्लंघनों पर भी जुर्माना बढ़ाया जाएगा।
उत्तराखंड जल प्रबंधन एवं विनियामक अधिनियम, 2013 के तहत अधिकतम एक वर्ष की जेल घटाकर छह माह करने और सार्वजनिक संपत्ति पर लिखने, रंगने या विज्ञापन चिपकाने पर जेल एक वर्ष से घटाकर तीन माह और जुर्माना 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है। संपत्ति बहाल करने की लागत भी दोषी को चुकानी होगी।
निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने पर अतिरिक्त राशि के दस गुना तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसकी अधिकतम सीमा दो लाख रुपये होगी। संबंधित अपराध में जेल का प्रविधान हटाने का प्रस्ताव है। वहीं, पंचायती राज अधिनियम, 2016 की एक उपधारा हटाने का प्रस्ताव भी विधेयक में शामिल है।
यूआइआइडीबी में अब प्रबंध निदेशक के स्थान पर सीईओ
उत्तराखंड में गठित यूआइआइडीबी में अब प्रबंध निदेशक के स्थान पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुखिया होंगे। सदन में पेश उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना विकास और विनियमन संशोधन विधेयक में यह प्रविधान प्रस्तावित है। ये भी प्रस्ताव है कि यूआइआइडीबी द्वारा व्यक्तिगत या भागीदारी अथवा सरकारी विभाग या सार्वजनिक अभिकरण के माध्यम से प्रारंभ की गई परियोजनाओं में पंरसंपत्तियों, सुविधाओं व सेवाओं का रखरखाव और संचालन भी किया जाएगा।
विकास कार्यों के लिए अधिक ऋण ले सकेगी सरकार
राज्य में विकास कार्यों को गति देने के लिए सरकार अब अधिक ऋण ले सकेगी। इस कड़ी में एक अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 को समाप्त होने वाले पांच वर्ष की अवधि में सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत अधिक न हो।
साथ ही इस अवधि में राज्य सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में कुल दायित्व व संचयी ऋण सीमा 30 प्रतिशत से अधिक न हो। अब सरकार 30 प्रतिशत तक की सीमा में ऋण ले सकेगी। इसके लिए उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक सदन में रखा गया है।
राज्य में खुलेंगे तीन नए निजी विश्वविद्यालय
उच्च शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ ही राज्य को शिक्षा का हब बनाने की दिशा में सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है। सरकार की ओर इस संबंध में सदन में उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय द्वितीय संशोधन विधेयक पेश किया गया। इसके तहत हरिद्वार में आरोग्यम विश्वविद्यालय व बीएसएम विश्वविद्यालय और चंपावत में मां पूर्णागिरी विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव है।
जीएसटी कानून में संशोधन का प्रस्ताव, व्यापारियों को मिलेगी सुविधा
सरकार ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून को सरल बनाने और व्यापारियों की सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 सदन में रखा है। इसमें छूट से संबंधित प्रविधानों, जमा पत्र (क्रेडिट नोट) जारी करने और कर वापसी की प्रक्रिया में संशोधन शामिल हैं।
इसके तहत आपूर्ति के बाद दी गई छूट से जुड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट को निर्धारित प्रविधानों के अनुसार समायोजित करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही कर बीजक में अधिक कर योग्य मूल्य या कर दर्ज होने, माल वापस किए जाने अथवा आपूर्ति में कमी पाए जाने की स्थिति में जमा पत्र जारी करने के प्रविधानों को स्पष्ट किया गया है।
