उत्तराखंड देश का पांचवा ऐसा राज्य जहां गुटखा-पान मसाला बैन, जानें कहां-कहां प्रतिबंधित हैं तंबाकू उत्पाद
उत्तराखंड सरकार ने गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर एक साल का प्रतिबंध लगाया है, जिससे यह इस वर्ष ऐसा करने वाला पांचवां राज्य बन गया है।


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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, देहरादून। गुटखा, पान मसाला और तंबाकू के सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों पर अंकुश लगाने के दृष्टिगत उत्तराखंड सरकार का इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाना एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही उत्तराखंड ऐसा पांचवां राज्य बन गया है, जिसने इसी वर्ष तंबाकूयुक्त उत्पादों के उत्पादन से लेकर बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। इस फैसले का उद्देश्य लोगों, खासकर युवाओं और किशोरों को तंबाकू के दुष्प्रभावों से बचाना और जनस्वास्थ्य को मजबूत करना है।
कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख जोखिम
तंबाकू का सेवन मुंह व गले के कैंसर, दांतों और मसूड़ों की बीमारियों सहित कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख जोखिम कारक है। गुटखा और तंबाकूयुक्त पान मसाला मुंह की श्लेष्मा झिल्ली को नुकसान पहुंचाते हैं। इनके नियमित सेवन से मुंह कम खुलने जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है, जो आगे चलकर दैनिक जीवन और खानपान को प्रभावित करती है।
तंबाकू में मौजूद निकोटीन लत पैदा करता है, जिसके कारण सेवन छोड़ना कई लोगों के लिए कठिन हो जाता है। यही नहीं, तंबाकू से जुड़ी बीमारियों का असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उपचार पर होने वाला खर्च, काम करने की क्षमता में कमी और परिवार पर आर्थिक बोझ भी इसके गंभीर परिणाम हैं।
इस सबको देखते हुए विभिन्न राज्य अपने-अपने यहां तंबाकूयुक्त उत्पादों पर प्रतिबंध लगाते आए हैं। इसी वर्ष की बात करें तो जनवरी में ओडिशा, मई में झारखंड, जुलाई में महाराष्ट्र, अगस्त में कर्नाटक राज्य इन उत्पादों को प्रतिबंधित कर चुके हैं। अब उत्तराखंड ने भी एक साल के लिए यह कदम उठाया है। इससे पहले तमिलनाडू, केरलम, गोवा, आंध्र प्रदेश, गुजरात व हरियाणा राज्यों में भी इसी तरह के प्रतिबंध की जानकारी आई है।
कार्रवाई तथा जनजागरूकता अभियान जरूरी
इस प्रतिबंध की सफलता केवल सरकारी आदेश तक सीमित नहीं रह सकती। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बिक्री और वितरण पर निगरानी, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई तथा जनजागरूकता अभियान जरूरी हैं।
स्कूलों, कालेजों और समुदायों में युवाओं को तंबाकू के नुकसान के बारे में जागरूक करना भी अहम होगा। इसके साथ ही, तंबाकू की लत से जूझ रहे लोगों को परामर्श और नशामुक्ति सेवाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। प्रतिबंध के साथ जागरूकता, उपचार और नियमित निगरानी का समन्वय ही उत्तराखंड को तंबाकूमुक्त समाज की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।
