राज्य ब्यूरो, देहरादून : Uttarakhand Assembly Winter Session : विधानसभा के शीतकालीन सत्र के लिए प्रश्न लगाने को लेकर विधायकों ने उत्साह दिखाया है। अभी तक विधायकों द्वारा लगाए गए विभिन्न विषयों से संबंधित 524 प्रश्न इसका उदाहरण हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा कि यह विधायकों की जागरूकता को प्रदर्शित करता है कि वे अपने क्षेत्र और राज्य से जुड़े विषयों को लेकर सजग हैं। उन्होंने कहा कि विधायकों से उनका आग्रह रहेगा कि वे सदन में अपनी बात को शांतिपूर्ण ढंग से अच्छे से रखें। साथ ही राज्य की दिशा क्या हो, इस पर सारगर्भित चर्चा करें।

विधानसभा अध्यक्ष खंडूड़ी ने सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बुलाई गई बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि सत्र को लेकर सभी तैयारियां लगभग पूर्ण हो चुकी हैं।

समन्वय के साथ कार्य करते हुए सत्र प्रेम से चले, आराम से चले, यह सबका प्रयास रहेगा। एक प्रश्न पर उन्होंने कहा कि विधानसभा में 182 कर्मचारी हैं। मार्शल भी पर्याप्त हैं। जरूरत पड़ेगी तो पुलिस की व्यवस्था करेंगे, लेकिन ऐसी स्थिति आएगी नहीं।

चाक-चौबंद रखें व्यवस्था

विधानसभा अध्यक्ष खंडूड़ी ने इससे पहले विधानसभा भवन के सभागार में हुई बैठक में अधिकारियों के साथ सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंथन किया। बैठक में मंत्रियों, विधायकों, मीडिया व दर्शकों की सुविधाओं और सुरक्षा के दृष्टिगत कई बिंदुओं पर चर्चा हुई।

विधानसभा अध्यक्ष ने अधिकारियों को व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। साथ ही पिछले सत्रों की भांति सभी से सहयोग की अपेक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव डा एसएस संधु, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था वी मुरुगेशन, मंडलायुक्त सुशील कुमार, पुलिस महानिरीक्षक इंटेलिजेंस एपी अंशुमान, जिलाधिकारी देहरादून सोनिका, पुलिस उपमहानिरीक्षक गढ़वाल करण सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक इंटेलिजेंस निवेदिता कुकरेती समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

विस सचिवालय से हाल में बर्खास्त कर दिए गए थे 228 तदर्थ कर्मचारी

विधानसभा का 29 नवंबर से प्रारंभ होने वाला शीतकालीन सत्र इस बार विधानसभा अध्यक्ष के लिए भी चुनौतीपूर्ण रहेगा। उन्हें कम कर्मचारियों के साथ ही कामचलाऊ सचिव के बूते सदन को संचालित करना होगा।

यद्यपि, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण का कहना है कि चुनौती जैसी कोई बात नहीं है। सभी अधिकारी-कर्मचारी अनुभवी और सत्र आयोजित कराने में पूरी तरह सक्षम हैं। सभी मिलकर शीतकालीन सत्र को बेहतर ढंग से चलाएंगे।

बदली परिस्थितियों में हो रहा विधानसभा का शीतकालीन सत्र हंगामेदार रहने के आसार जताए जा रहे हैं। भर्ती घोटालों और वनंतरा रिसार्ट प्रकरण जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष मुखर है और उसने सरकार को सदन के भीतर व बाहर घेरने की रणनीति बनाई है। यद्यपि, सरकार ने भी इसके लिए अपने तरकश में तीर तैयार किए हैं।

इस परिदृश्य के बीच विधानसभा सचिवालय के दृष्टिकोण से देखें तो उसके सामने कार्मिकों की कमी का विषय रहेगा। वर्ष 2016, 2020 व 2021 में नियुक्त किए गए 228 तदर्थ कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया था। भर्ती प्रकरण का मामला तूल पकडऩे के बाद कराई गई जांच में ये बात सामने आई कि ये भर्तियां नियम विरुद्ध हुई थीं।

ऐसे में विभिन्न अनुभागों से हटाए गए इन कर्मियों के काम का बोझ भी अन्य कर्मचारियों पर आना तय है। यही नहीं, विधानसभा के सचिव मुकेश सिंघल निलंबित चल रहे हैं। उन पर पूर्व में विधानसभा में भर्तियों के लिए विवादित एजेंसी का चयन करने का आरोप है।

यद्यपि, विधानसभा के कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए कामचलाऊ व्यवस्था के तहत लेखा संवर्ग के उपसचिव को प्रभारी सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। परिणामस्वरूप कम कर्मचारियों के बूते सदन की कार्रवाई संचालित करने की चुनौती रहेगी।

नई बात नहीं है विधानसभा में तदर्थ भर्ती को विचलन से मंजूरी

विधानसभा सचिवालय में वर्ष 2021 में हुई 72 तदर्थ नियुक्तियों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा विचलन के माध्यम से मंजूरी देने के विषय को विपक्ष ने भले ही मुद्दा बनाया, लेकिन यह पहली बार नहीं हुआ है।

इससे पहले भी कांग्रेस व भाजपा सरकारों के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्रियों की ओर से विधानसभा में विचलन से तदर्थ भर्ती को स्वीकृतियां देने का इतिहास रहा है। वर्ष 2021 में दी गई मंजूरी में विशेष बात यह है कि ये केवल सालभर के लिए थीं, जिसे दिसंबर 2022 में समाप्त होना था।

विधानसभा में तदर्थ भर्तियों को लेकर पीछे नजर दौड़ाएं तो राज्य गठन के बाद से ही यह पंरपरा चली आ रही है। विधानसभा में 72 नियुक्तियों का मामला तूल पकडऩे के बाद गठित डीके कोटिया समिति ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया है।

विधानसभा में भर्तियों के इतिहास को देखें तो वर्ष 2001 में अंतरिम सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी ने विधानसभा में 53 पदों पर तदर्थ भर्ती के लिए विचलन से स्वीकृति दी थी। इसके बाद कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने वर्ष 2002 से लेकर वर्ष 2006 तक 80 पदों के लिए इसी तरह मंजूरी दी।

वर्ष 2007 में भाजपा सरकार बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने 27 पदों पर भर्ती के लिए मंजूरी दी थी। यही नहीं, वर्ष 2012 में जनता ने सत्ता कांग्रेस को सौंपी। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने वर्ष 2014 में सात और वर्ष 2016 में 149 पदों के लिए विचलन से स्वीकृति दी। वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद भी यही परंपरा जारी रही और वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 72 पदों के लिए इसी तरह स्वीकृति दी।

असल में विधानसभा में तदर्थ नियुक्तियों के संबंध में विधानसभा सरकार को प्रस्ताव भेजती है। सरकार की ओर से मंजूरी मिलने के बाद भर्ती को लेकर जो भी प्रक्रिया अपनाई जाती है, वह विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर होती है। मुख्यमंत्री धामी ने अपने पिछले कार्यकाल में तदर्थ पदों के लिए विचलन के माध्यम से स्वीकृति दी, लेकिन इसे नियंत्रित करते हुए यह एक साल की अवधि के लिए दी गई।

Edited By: Nirmala Bohra

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