सर्वे में खुलासा, उत्तराखंड के 35 हजार से अधिक मासूम मानसिक विकारों से पीड़ित
उत्तराखंड में 35 हजार से अधिक बच्चे मानसिक और विकास संबंधी विकारों से जूझ रहे हैं, जिनमें बौद्धिक दिव्यांगता, चिंता ...और पढ़ें

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

समय कम है?
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अश्वनी त्रिपाठी, जागरण, देहरादून । उत्तराखंड में 35 हजार से अधिक बच्चों के हिस्से में बचपन की खुशियां नहीं आ सकीं। ये बच्चे मानसिक व विकास संबंधी विकारों से जूझ रहे हैं। बौद्धिक दिव्यांगता से लेकर ध्यान, सीखने में कठिनाई, अवसाद, चिंता और आटिज्म जैसी चुनौतियों ने इनका बालपन छीन लिया है।
इनमें से कुछ मासूम अपनी बात कहने के लिए शब्द तलाशते रह जाते हैं, तो कुछ ऐसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, जिन्हें वे खुद समझ नहीं पाते। उनकी खामोशी को कभी जिद, तो उनकी धीमी रफ्तार को नाकामी मान लिया जाता है। इस अनकहे संघर्ष में माता-पिता हर दिन नई राह तलाशते हैं।
परिवारों तक नहीं पहुंच सकी योजनाओं की जानकारी
इन बच्चों को दया नहीं, संवेदना, समझ और अवसर चाहिए, लेकिन चुनौती यह है कि इन बच्चों के लिए सरकारी योजनाएं तो बनाई गईं, मगर उनकी जानकारी परिवारों तक नहीं पहुंच सकी है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देश पर किए गए सर्वेक्षण में यह तस्वीर सामने आई है। यह सर्वे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहांस) बेंगलुरु, उत्तराखंड राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण और राजकीय दून मेडिकल कालेज ने मिलकर किया।
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देहरादून, पौड़ी, अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों में शून्य से 17 वर्ष तक के बच्चों का अध्ययन किया गया। सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार राज्य में लगभग 35,746 बच्चे मानसिक विकारों से जूझ रहे हैं। सर्वेक्षण में सामने आया कि 66 प्रतिशत माता-पिता मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए सरकारी या नगर निकाय के अस्पतालों में जाते हैं। वहीं, 32 प्रतिशत लोग निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं।
उत्तराखंड में बच्चों और किशोरों के बीच आटिज्म, बौद्धिक दिव्यांगता तथा सामान्य मनोरोग संबंधी विकारों की स्थिति का आकलन करने के देश में पहली बार इस तरह का सर्वेक्षण किया गया। यह बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, इसके नतीजों से उत्तराखंड के बच्चों के स्वास्थ्य एवं कल्याण को बेहतर बनाया जा सकेगा। -डा. सुनीता टम्टा, स्वास्थ्य महानिदेशक
उत्तराखंड के बच्चों में मानसिक समस्याएं
- विकार, ग्रसित बच्चे
- बौद्धिक दिव्यांगता, 14,790
- पढ़ने-लिखने में परेशानी, 12,369
- चिंता और अवसाद, 5,067
- आटिज्म, 2,445
- एडीएचडी (ध्यान की कमी), 1,075
क्यों बढ़ रहे मानसिक विकार
- आनुवंशिक कारण : कुछ मामलों में जीन और आनुवंशिक कारकों की भूमिका।
- गर्भावस्था की जटिलताएं : संक्रमण, समय से पहले जन्म और जन्म के समय आक्सीजन की कमी जैसे कारण।
- मस्तिष्क के विकास में बाधा : इस कारण आटिज्म, एडीएचडी और बौद्धिक दिव्यांगता जैसी स्थितियां हो रहीं।
- तनाव और प्रतिकूल अनुभव : घरेलू कलह, हिंसा, उपेक्षा, पढ़ाई का दबाव और बुलिंग से चिंता-अवसाद का जोखिम।
- जागरूकता की कमी : लक्षणों की देर से पहचान और विशेषज्ञ सेवाओं में देरी से भी समस्या उत्पन्न हो रही है।
