'सशक्त उत्तराखंड 2025–2035' का विजन: ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश उतरा धरातल पर, GSDP दोगुनी करने की ओर मजबूत कदम
उत्तराखंड के 'सशक्त उत्तराखंड 2025-2035' रोडमैप के तहत ₹3.56 लाख करोड़ के निवेश समझौतों में से ₹1.01 लाख करोड़ से ...और पढ़ें

HighLights
₹1.01 लाख करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतरा।
राज्य की GSDP दोगुनी करने का लक्ष्य साकार हो रहा।
स्थानीय रोजगार सृजन, पलायन पर अंकुश लगाने में सहायक।
डिजिटल टीम, देहरादून।उत्तराखंड को आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार का 'सशक्त उत्तराखंड 2025–2035' रोडमैप तेजी से परिणाम देने लगा है। प्रदेश की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) को दोगुना करने के लक्ष्य के तहत आयोजित उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान हुए ₹3.56 लाख करोड़ के करारों में से अब तक ₹1.01 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं।
किस इंडस्ट्री में कितना फोकस
| प्रमुख सेक्टर (उद्योग) | अनुमानित निवेश हिस्सेदारी | मुख्य परियोजनाएं व फोकस क्षेत्र |
| ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा | ~₹35,000 - ₹40,000 करोड़ | हाइड्रोपावर, सोलर रूफटॉप व माइक्रोग्रिड, पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स और ग्रीन हाइड्रोजन। |
| विनिर्माण एवं ऑटोमोबाइल | ~₹25,000 - ₹30,000 करोड़ | सिडकुल (पंतनगर, हरिद्वार, सितारगंज) में ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी और इंजीनियरिंग यूनिट्स। |
| पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी व वेलनेस | ~₹15,000 - ₹20,000 करोड़ | 5-स्टार रिसॉर्ट्स, वेलनेस स्पा, ईको-टूरिज्म, नए होमस्टे और एडवेंचर स्पोर्ट्स पार्क। |
| आयुष, फार्मा एवं हेल्थकेयर | ~₹10,000 - ₹12,000 करोड़ | हरिद्वार-सेलाकुई फार्मा हब का विस्तार, आयुर्वेदिक दवा निर्माण, हर्बल प्रोसेसिंग और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल। |
| खाद्य प्रसंस्करण व कृषि | ~₹5,000 - ₹7,000 करोड़ | 'हाउस ऑफ हिमालयाज' से जुड़े कोल्ड चेन, एरोमैटिक प्लांट प्रोसेसिंग, एप्पल व कीवी पैकेजिंग यूनिट्स। |
| शिक्षा, कौशल व आईटी/डेटा सेंटर | ~₹4,000 - ₹5,000 करोड़ | देहरादून-पंतनगर में टेक पार्क, स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटीज और डिजिटल लॉजिस्टिक्स। |
राज्य में निवेश के अनुकूल बने माहौल और सशक्त उत्तराखंड के रोडमैप पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इस दशक को 'उत्तराखंड का दशक' बताया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में उद्योग जगत ने उत्तराखंड की नीतियों, शांति व्यवस्था और पारदर्शी प्रशासन पर जो भरोसा जताया था, आज वह धरातल पर साकार हो रहा है। हमने सिर्फ एमओयू साइन नहीं किए, बल्कि सिंगल विंडो सिस्टम और निवेशकों से निरंतर संवाद के जरिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को जमीन पर उतारा है। हमारा संकल्प स्पष्ट है- पर्यावरण संरक्षण के साथ ऐसा समावेशी औद्योगिक विकास करना, जिससे हमारे युवाओं को बाहर न जाना पड़े और 2035 तक उत्तराखंड आत्मनिर्भर और सशक्त राज्य बने। उद्योग, नवाचार और सुशासन का यह मॉडल प्रदेश के हर नागरिक के जीवन में समृद्धि लाएगा।
बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर
पहाड़ों से रिवर्स माइग्रेशन (पलायन पर अंकुश): अब तक उद्योग केवल तराई के मैदानी इलाकों (ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून) तक सीमित थे। नई नीतियों के तहत टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जनपदों में आयुष, होमस्टे, वेलनेस, फूड प्रोसेसिंग और सौर ऊर्जा की इकाइयां स्थापित हो रही हैं, जिससे युवाओं को अपने ही पहाड़ में रोजगार मिल रहा है।
सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में छलांग: ₹1 लाख करोड़ से अधिक का पूंजी निवेश सीधे तौर पर राज्य के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को गति दे रहा है। इससे राज्य का टैक्स राजस्व बढ़ेगा, जिसे स्वास्थ्य, सड़क और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण में लगाया जा रहा है।
विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा: निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, चारधाम ऑल-वेदर रोड, पंतनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे का नेटवर्क राज्य को देश की राजधानी और बड़े बंदरगाहों से तेज गति से जोड़ रहा है।
स्थानीय और सूक्ष्म उद्यमियों को संबल: बड़े उद्योगों के साथ-साथ एमएसएमई (MSME), स्थानीय आटा चक्कियों, पैकेजिंग इकाइयों और स्थानीय सप्लायर्स का नेटवर्क विकसित हुआ है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ा है।
