राज्य ब्यूरो, गैरसैंण। उत्तराखंड में स्थित उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की कॉलोनियों और भूखंड के संबंध में उत्तर प्रदेश से पत्रावलियां हासिल करने की प्रक्रिया जारी है। इसके बाद ही इन कॉलोनियों में हुए अवैध निर्माणों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने बजट सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायकों द्वारा उठाए प्रश्नों के उत्तर में यह बात कही। इस दौरान वह विधायकों के कुछ सवालों से असहज भी हुए।

विधायक गणेश जोशी ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की देहरादून समेत अन्य स्थानों पर स्थित कालोनियों में होटलों के संचालन का मामला उठाते हुए जानना चाहा कि ऐसे होटल को किस स्तर पर अनुमति दी गई। जवाब देते हुए शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि वर्ष 2006 में उप्र आवास विकास परिषद की उत्तराखंड में स्थित परिसंपत्तियों से संबंधित शिकायत आने के बाद इस दिशा में कार्रवाई शुरु की गई। मौजूदा सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड आवास विकास परिषद के मध्य वर्ष 2019 में समझौता हुआ। इसके तहत उप्र आवास विकास परिषद की उत्तराखंड में जितनी भी कॉलोनियां व भूखंड हैं, वह उत्तराखंड को मिलेंगे। इस संबंध में उप्र आवास विकास परिषद से अभिलेख प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है।

विधायक जोशी ने प्रश्न किया कि यहां परिषद की कॉलोनियों में बगैर अनुमति के जो होटल खुले हैं, क्या वे ध्वस्त होंगे। इस पर शहरी विकास मंत्री ने कहा कि उप्र से सभी पत्रावली आने के बाद अवैध निर्माण पर कार्रवाई की जाएगी। इसी बीच विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने सवाल किया कि आवास विकास परिषद की कालोनियों व भूखंडों को रेगुलेट करने का काम कौन कर रहा है, इसके अधिकार किसके पास हैं। कैबिनेट मंत्री कौशिक ने बताया कि उप्र आवास विकास परिषद के छह कार्यालय हैं। इनके साथ एक प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है। पत्रावली आने पर कदम उठाए जाएंगे। इस पर विधायक चौहान ने कहा कि ये सत्य नहीं है। उप्र आवास विकास परिषद ने जो सर्कुलर जारी किया है, उसमें कहा गया है कि एक कट आफ डेट के बाद उत्तराखंड ही इसे रेगुलेट करेगा।

विधायक उमेश शर्मा काऊ के सवाल के उत्तर में शहरी विकास मंत्री ने बताया कि एडीबी के वित्त पोषण से जलापूर्ति वितरण प्रणाली की योजना से पूर्व में रायपुर विधानसभा क्षेत्र का अधिकांश क्षेत्र शामिल था। जुलाई 2016 में इससे संबंधित अनुबंध निरस्त कर दिया गया था। इसी बीच विधायक काऊ ने कहा कि इसके बाद यह मामला प्राक्कलन समिति में गया था और ये निर्णय हुआ था कि इस क्षेत्र को पहले लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रश्न के लिखित जवाब में बताया गया है कि अधूरी योजना को इसमें सम्मिलित नहीं किया गया है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि मंत्री का वक्तव्य गुमराह करने वाला है। हालांकि, शहरी विकास मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब एडीबी की नई योजना में रायपुर क्षेत्र को शामिल किया जा रहा है।

287 मलिन बस्तियां चिह्नित

प्रदेश में नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर व हरिद्वार में 159 और नगर निगम देहरादून में 128 मलिन बस्तियां हैं। विधायक खजानदास के सवाल के जवाब में शहरी विकास मंत्री ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों में मलिन बस्ती विनियमितीकरण को अपनाई गई प्रक्रिया के अध्ययन को निदेशक शहरी विकास की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। उसकी आख्या के उपरांत मलिन बस्तियों के विनियमितीकरण के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

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