जागरण संवाददाता, देहरादून। देशी लड़ियों के बढ़े प्रचलन से न केवल चीनी आइटम के बाजार को सिमटने पर मजबूर कर दिया, वहीं बेरोजगारों को रोजगार भी मिल रहा है। औद्योगिक क्षेत्र मोहब्बेवाला, पटेलनगर, लालतप्पड़, सेलाकुई, प्रेमनगर आदि क्षेत्र में 105 से अधिक एमएसएमई इकाइयों में देशी लड़ियां की मांग तीन गुना तक बढ़ गई हैं।

पिछले वर्ष इस उद्योगों ने जहां दीपावली के मौके पर पांच से छह करोड़ के आसपास देशी लड़ियां, इलेक्ट्रानिक दीये और देवी-देवताओं की मूर्तियों का कारोबार हुआ, वहीं इस बार 11 से 12 करोड़ रुपये का मांग अब तक मिल चुकी है। मोहब्बेवाला स्थित एक उद्योग में हेल्पर संजीव कुमार गुरंग, विमल रावत, आदेश कुमार शुक्ला आदि ने कहा कि दीपावली के दौरान देशी लड़ियां व अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों की बढ़ी मांग के चलते उद्योगों में रात की शिफ्ट भी चल रही है।

निदेशक उद्योग सुधीर चंद्र नौटियाल का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारें स्थानीय उद्योगों को प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उद्यमियों को प्रदेश का ब्रांड एंबेसडर बनाया है। उद्योगपति मेक इन इंडिया योजना का लाभ उठाते हुए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दे रहे हैं। हस्तशिल्प व हथकरघा से जड़े कारीगर भी प्रगति की राह पर हैं।

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एसोसिएशन आफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा, केंद्र की मोदी सरकार के मेक इन इंडिया व 'वोकल फार लोकल' राष्ट्रव्यापी अभियान का असर दून के बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। दीपावली के अवसर पर बाजार में चाइनीज आइटम बहुत कम दिखाई दे रहे हैं। देशी लड़ियां और फैंसी आइटम से बाजार चमक रहे हैं। लोकल उत्पादों से न केवल व्यापारियों बल्कि छोटे कारोबारी व कारीगरों को सीधा लाभ मिल रहा है।

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Edited By: Raksha Panthri

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