राज्य ब्यूरो, देहरादून: प्रदेश के एकमात्र क्षेत्रीय दल के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के सामने इस समय खुद का वजूद बचाए रखने की चुनौती है। लोकसभा चुनावों में दल ने पांचों सीटों पर लड़ने का ऐलान। इसके लिए हर सीट पर दो-दो प्रत्याशियों का नामांकन करने की तैयारी है। मकसद यह कि यदि कोई अंतिम क्षणों में कदम पीछे खींचता है तो कम से कम दूसरा चुनावों में दल की उपस्थित दर्ज करा सके।

उत्तर प्रदेश के पर्वतीय जिलों को मिलाकर अलग राज्य बनाने की अवधारणा को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल का जन्म हुआ। राज्य आंदोलन में उक्रांद की अहम भूमिका रही। राज्य गठन के बाद पहले विधानसभा चुनाव में चार सीटों पर सफलता मिली थी और दल को कुल 5.49 प्रतिशत मत मिले। इसके बाद उक्रांद का प्रदर्शन गिरता ही रहा। यहां तक की दल कई धड़ों में बंट गया और उसका चुनाव चिह्न तक छिन गया। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों के बाद उक्रांद में एकता कायम हुई। अब दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपना वोट प्रतिशत बढ़ाने की है। इसके लिए दल की मंशा सभी लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की है। दरअसल, अभी तक हुए लोकसभा चुनावों में दल प्रत्याशी तो घोषित करता था लेकिन कई बार नामांकन के बाद प्रत्याशी अपने कदम पीछे खींच लेते थे। इससे दल का मत प्रतिशत बहुत कम हो जाता था। इसके कारण कुछ पदाधिकारियों पर आरोप भी लगे।

इस बार उक्रांद हर सीट पर चुनाव लड़ने का इच्छुक है और इसी कारण हर सीट पर दो-दो दावेदारों से नामांकन कराने की तैयारी है। दल के अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने इसकी पुष्टि की। हालांकि, उनका कहना है कि किसी एक प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने की सूरत में भी दल चुनाव में उतर सके, इस कारण दो-दो नामांकन कराने की तैयारी है। दल चुनाव अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए चुनाव लड़ रहा है।

कुर्सी चुनाव चिह्न पर अभी संशय

उत्तराखंड क्रांति दल को आने वाले चुनावों में फिलहाल दल का पारंपरिक चुनाव चिह्न कुर्सी मिलने पर संशय है। दरअसल, पहले यह चिह्न सीज हो चुका था। अब इसके लिए दल ने भारत निर्वाचन आयोग में अपील की है। अनुमति न मिलने की सूरत में उक्रांद को कप-प्लेट चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है।

Posted By: Jagran

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