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मुनस्यारी के बुरांश और चंपावत के शहद की कॉफी... दून के तुषार ने उत्तराखंड से दिल्ली पहुंचाया पहाड़ का स्वाद

Published: Fri, 11 Sep 2026 11:20 AM (IST)

दून के तुषार अरोड़ा ने दिल्ली में नेशनल बरिस्ता चैंपियनशिप के प्रीलिम्स में मुनस्यारी के बुरांश और चंपावत के शहद को कॉफी के साथ मिलाकर एक नया प्रयोग किया।

दून निवासी तुषार अरोड़ा को सम्मानित करते काफी बोर्ड आफ इंडिया के अधिकारी।

दून निवासी तुषार अरोड़ा को सम्मानित करते काफी बोर्ड आफ इंडिया के अधिकारी।

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जागरण संवाददाता, देहरादून। कॉफी के स्वाद में अब पहाड़ की खुशबू भी शामिल हो रही है। दून के तुषार अरोड़ा ने दिल्ली में हुई नेशनल बरिस्ता चैंपियनशिप के प्रीलिम्स में मुनस्यारी के बुरांश और चंपावत के शहद को कॉफी के साथ जोड़कर नया प्रयोग किया। देशभर के बरिस्ता के बीच तुषार ने स्थानीय उत्पादों से तैयार कॉफी पेश कर उत्तराखंड के स्वाद को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।

विंटरलाइन कॉफी रोस्टर्स से जुड़े तुषार ने प्रतियोगिता के लिए सामान्य कॉफी फ्लेवर के बजाय उत्तराखंड की स्थानीय सामग्री को चुना। उनका प्रयास था कि कॉफी की अपनी खुशबू और स्वाद के साथ बुरांश की खासियत और शहद की प्राकृतिक मिठास का संतुलन बनाया जाए। इस तरह तैयार कॉफी में स्थानीय स्वाद को आधुनिक कॉफी संस्कृति के साथ जोड़ने की कोशिश की गई।

नेशनल बरिस्ता चैंपियनशिप

कॉफी बोर्ड आफ इंडिया की ओर से आयोजित नेशनल बरिस्ता चैंपियनशिप में देशभर से बरिस्ता शामिल हुए। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के लिए सिर्फ अच्छी कॉफी तैयार करना ही चुनौती नहीं होती, बल्कि कॉफी की गुणवत्ता, स्वाद, प्रस्तुति और नए प्रयोग भी अहम होते हैं। दिल्ली में हुए प्रीलिम्स के बाद विभिन्न क्षेत्रों से चुने गए शीर्ष 16 प्रतिभागी राष्ट्रीय खिताब के लिए अगले चरण में मुकाबला करेंगे।

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तुषार के लिए प्रतियोगिता में स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल केवल एक नया फ्लेवर तैयार करने तक सीमित नहीं था। वह उत्तराखंड के बुरांश और शहद जैसे उत्पादों को कॉफी की बढ़ती संस्कृति से जोड़कर उनके लिए नए बाजार की संभावना भी तलाश रहे हैं। उनका मानना है कि स्थानीय उत्पादों को नए व्यंजनों और पेय के साथ जोड़ा जाए तो उनकी मांग और पहचान दोनों बढ़ सकती हैं।

बरिस्ता के पेशे को लेकर भी तुषार युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाना चाहते हैं। उनका जोर उत्तराखंड के युवाओं को कॉफी उद्योग से जुड़े हुनर सीखने और इसे रोजगार के विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करने पर है। दिल्ली के राष्ट्रीय मंच पर तुषार की कॉफी में इसलिए खास बात सिर्फ उसका स्वाद नहीं रहा, बल्कि यह भी रहा कि उसके फ्लेवर में मुनस्यारी का बुरांश और चंपावत का शहद, दोनों उत्तराखंडी पहचान के साथ मौजूद थे।