देहरादून, राज्य ब्यूरो। परिवहन विभाग के पांच कार्यालयों में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी नहीं हैं। इनमें दो संभागीय कार्यालय (आरटीओ) व तीन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय (एआरटीओ) शामिल हैं।

प्रदेश में इस समय सड़क सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसकी प्रमुख जिम्मेदारी संभागीय परिवहन कार्यालय व सहायक संभागीय कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों पर होती है। परिवहन विभाग में स्थिति यह है कि सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी जैसे अहम पद खाली पड़े हुए हैं। इन कार्यालयों पर नजर डालें तो हाल ही में शासन ने पौड़ी जिले से एआरटीओ की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी का देहरादून तबादला किया है। नतीजतन यहां एआरटीओ प्रवर्तन व एआरटीओ प्रशासन के दोनों पद खाली चल रहे हैं। यह व्यवस्था आरटीओ व टीटीओ प्रथम स्तर के अधिकारी देख रहे हैं।

अल्मोड़ा आरटीओ कार्यालय में भी यही स्थिति है। यहां भी एआरटीओ प्रवर्तन व प्रशासन के पद रिक्त चल रहे हैं। अब बात करते हैं एआरटीओ कार्यालयों की, जहां एआरटीओ ही मुखिया होता है। इस समय विकासनगर, रुड़की और बागेश्वर एआरटीओ कार्यालय में एआरटीओ स्तर के अधिकारी तैनात ही नहीं हैं। यहां व्यवस्था रामभरोसे चल रही है।

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यहां विशेष यह कि रुड़की व विकासनगर राज्यों की सीमाओं के कार्यालय हैं, जहां से बड़ी संख्या में अन्य राज्य के वाहनों का आवाजाही होती है। बागेश्वर एक पर्वतीय क्षेत्र हैं, वहां भी बड़ी संख्या में व्यावसायिक वाहनों का संचालन होता है। ये सभी ऐसे क्षेत्र हैं जहां प्रवर्तन यानी जांच का कार्य सबसे अहम होता है। 

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सूत्रों की मानें तो वर्तमान में यह स्थिति राजनीतिक दबाव के कारण आई है। अपने चहेतों को अच्छे स्थानों पर तैनात करने के फेर में इन पांच अहम कार्यालयों में एआरटीओ के पद खाली चल रहे हैं। हालांकि, उप आयुक्त परिवहन मुख्यालय एसके सिंह का कहना है कि इन स्थानों पर सक्षम अधिकारी तैनात हैं।  

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