जागरण संवाददाता, देहरादून: हादसे रोकने को वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदेश में टैक्सी-मैक्सी संचालकों की हड़ताल का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ा। पूरे दिन हजारों लोगों ने घंटों सड़कों पर खड़े रहकर पर्वतीय मार्गो पर जाने वाले वाहनों का इंतजार किया, तो कुछ ने ओवरलोड बसों में सफर करने से भी गुरेज नहीं किया। राजधानी देहरादून के अलग-अलग क्षेत्रों में पर्वतीय टैक्सी स्टैंडों पर यात्रियों की भीड़ लगी रही, मगर वाहन नदारद रहे। दून से पर्वतीय मार्गो पर रोजाना करीब ढाई सौ मैक्सी-कैब नियमित संचालित होती हैं। इनमें हजारों लोग सफर करते हैं लेकिन गुरुवार को अनिश्चितकाल हड़ताल से परिवहन व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई। इस दौरान करीब साढे़ 12 सौ टैक्सी भी नहीं चलीं। पर्यटन के साथ यात्रा सीजन में हुई हड़ताल में चारधाम यात्रियों को सर्वाधिक कष्ट झेलना पड़ा। विभिन्न मांगों को लेकर परिवहन विभाग और सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोलने वाले मैक्सी-कैब संचालक चेतावनी के अनुसार गुरुवार से हड़ताल पर चले गए। इससे पूरे प्रदेश में पर्वतीय मार्गो पर परिवहन सुविधा ठप पड़ गई। अकेले देहरादून में ही हजारों यात्री सुबह से ही सड़कों व टैक्सी स्टैंडों के बाहर वाहनों का इंतजार करते रहे। हर टैक्सी स्टैंड से वाहन नदारद मिले। रिस्पना पुल पर्वतीय टैक्सी स्टैंड पर ट्रांसपोर्टरों ने अपने वाहन खड़े कर परिवहन मुख्यालय के विरोध में नारेबाजी भी की। ट्रांसपोर्टरों ने सरकार पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। हड़ताल की वजह से आमजन को परेशानी उठानी पड़ीं। अनुमान के मुताबिक, दून से रोजाना तकरीबन आठ-दस हजार लोग इन वाहनों में सफर करते हैं। इनका संचालन बंद रहने के कारण इन यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़ा व इन्हें गंतव्य तक जाने के लिए वाहन ही नहीं मिले। घंटों सड़को पर खड़े लोगों ने जैसे-तैसे दूसरे विकल्प तलाशे। ----------- दून में यहां से होता है संचालन- देहरादून में रिस्पना पुल से, राजपुर रोड पर एमडीडीए पार्किंग, परेड ग्राउंड, प्रिंस चौक, दीन दयाल पार्क आदि से पर्वतीय मार्गो व पूरे गढ़वाल मंडल के लिए टैक्सी व मैक्सी-कैब का संचालन होता है। इन सभी स्थानों पर गुरुवार को यात्रियों की भीड़ लगी रही। दून से इन इलाकों के लिए होता है मैक्सी-कैब का संचालन टिहरी, चंबा, उत्तरकाशी, श्रीनगर, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, जोशीमठ, ऋषिकेश, हरिद्वार, गुप्तकाशी, लैंसडोन, कोटद्वार, चिन्यालीसौढ़, देवप्रयाग, पुरोला, बड़कोट, घनसाली, धनोल्टी, मसूरी आदि। -------------- परिवहन सचिव ने बनाई कमेटी पुराने वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने में तकनीकी दिक्कतों के आरोपों पर परिवहन सचिव डी. सेंथिल पांड्यिन ने गुरुवार देर शाम परिवहन मुख्यालय में आपात बैठक बुलाई। अपर परिवहन आयुक्त सुनीता सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार 31 जनवरी 2017 से प्रदेश में व्यावसायिक वाहनों में स्पीड गर्वनर लगाने के आदेश दिए गए थे। इनमें नए वाहनों में निर्माता कंपनी डिवाइस लगाकर दे रही है, जबकि पुराने वाहनों में एआरआइ पुणे से अधिकृत नौ एजेंसियों द्वारा डिवाइस लगाए जा रहे हैं। चूंकि, ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि पुराने वाहनों में यह डिवाइस लगाने से कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रहीं, इसलिए आरटीओ सुधांशु गर्ग की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी में एआरटीओ कोटद्वार रावत सिंह, हरिद्वार के आरआइ चंद्रकांत भट्ट, आइडीटीआर झाझरा के उपनिदेशक आशीष शुक्ला को शामिल किया गया है। कमेटी एक माह के भीतर एक अक्टूबर 2015 से पूर्व निर्मित वाहनों में अपने सामने स्पीड गवर्नर लगा संचालन कर दिक्कतों का परीक्षण करेगी। वास्तविक परीक्षण के आधार पर कमेटी की रिपोर्ट आने तक स्पीड गवर्नर लगाने का आदेश स्थगित रहेगा। वहीं, इससे पहले ट्रांसपोर्टरों ने आरटीओ दफ्तर में नारेबाजी कर आरटीओ सुशांशु गर्ग का घेराव करते हुए विरोध भी जताया। इसलिए जरूरी है डिवाइस वाहनों की बेकाबू रफ्तार की वजह से होने वाले हादसों को रोकने के लिए ही सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों में स्पीड गवर्नर का आदेश दिया था। पहाड़ों में चूंकि हादसों का ग्राफ ज्यादा है, इसलिए यह डिवाइस हादसे रोकने में काफी अहम साबित होगी लेकिन ट्रांसपोर्टर इससे मानने को राजी ही नहीं हैं। वे सात-आठ हजार की डिवाइस लगाने के बजाए यात्रा-सीजन में हड़ताल के जरिए सरकार को ब्लैक-मेल करने पर उतर आए। जिससे सरकार को फैसले पर रोलबैक करना पड़ा। वहीं, ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल तो खत्म कर दी मगर अन्य मांगों को लेकर आरटीओ में धरना जारी रखने का एलान किया। ------------------- यह है ट्रांसपोर्टरों की मांगे -प्रदेश में सभी टैक्सी-मैक्सी की फिटनेस एक साल के लिए दी जाए। -लॉगबुक न भरे होने पर दंड की वसूली बंद की जाए। -टैक्सी-मैक्सी के लैगगार्ड को यथावत रखा जाए। -परमिट नवीनीकरण के समय भुगते गए चालान के पुन: भुगतान पर रोक लगाई जाए। -प्रदेश के वाहनों को ग्रीनकार्ड की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाए। ------------------- 'हमारी मांगे एकदम जायज हैं। सरकार बेफिजूल के नियम और जुर्माने तय करके हमारा उत्पीड़न कर रही है। उत्तर प्रदेश में अभी तक यह डिवाइस नहीं लगाई जा रही है। हम नए वाहनों में कंपनी से लगी आने वाली डिवाइस का समर्थन करते हैं लेकिन पुराने वाहनों को इससे मुक्त रखना चाहिए। वैसे भी पहाड़ में वाहन 30-40 किमी प्रति घंटे से ज्यादा नहीं चल पाते। जुगाड़बाजी वाली डिवाइस से हादसे का खतरा है।' सत्यदेव उनियाल, महासचिव दून गढ़वाल जीप कमांडर मालिक कल्याण समिति