ऋषिकेश, दुर्गा नौटियाल। बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का पहला रेलवे स्टेशन न्यू ऋषिकेश इस साल के खत्म होने तक बनकर तैयार हो जाएगा। अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन से अप्रैल 2020 से रेलगाड़ी के संचालन की तैयारी की जा रही है। रेल विकास निगम ने परियोजना के काम को पैकेज 1-ए में शुरू किया था, जिसपर करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन भारतीय रेल की एक स्वप्निल परियोजना है। पहाड़ पर 125 किमी लंबी रेल लाइन को मूर्त रूप देना रेल विकास निगम के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं है। भारतीय रेल के इतिहास में यह परियोजना कई मायनों में अनूठी है। यही वजह है कि रेल विकास निगम ने इसे चुनौती के रूप में लेते हुए पहाड़ में रेलगाड़ी दौड़ाने के सपने को साकार करने के लिए दिन-रात एक की हुई है। 

इस परियोजना के लिए निगम को सबसे पहले ऋषिकेश रेंज में वन भूमि का हस्तांतरण हुआ था। जहां न्यू ऋषिकेश रेलवे स्टेशन के निर्माण के साथ वीरभद्र रेलवे स्टेशन से नई लाइन बिछाने का काम किया जाना था। इस बीच पड़ने वाले बाईपास मार्ग पर रेल अंडर ब्रिज (आरयूबी) और इससे आगे देहरादून मार्ग पर रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण प्रस्तावित था। जिस पर रेल विकास निगम ने भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया के तत्काल बाद काम शुरू करा दिया था। वर्तमान में पैकेज 1-ए पर करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 

रेल विकास निगम के परियोजना प्रबंधक ओमप्रकाश मालगुड़ी ने बताया कि वीरभद्र रेलवे स्टेशन से न्यू ऋषिकेश के बीच रेल लाइन लगभग बिछ चुकी है। बाईपास मार्ग पर आरयूबी का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, जिसका एक पास आवागमन के लिए खोल दिया गया है। जबकि दूसरे पास को अक्टूबर पहले सप्ताह में खोलने की तैयारी है। बात न्यू ऋषिकेश रेलवे स्टेशन की करें तो दस प्लेटफार्म वाले इस स्टेशन पर भी काम जोरों पर हैं। 

यहां सभी प्लेटफार्म इस वर्ष के अंत तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। देहरादून मार्ग पर तैयार हो रहे आरओबी का काम भी अब अंतिम चरण में है। मालगुड़ी के अनुसार कोशिश है कि इस वर्ष के अंत तक हर हाल में न्यू ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को तैयार कर लिया जाए, जिससे अप्रैल 2020 से इसे उपयोग में लाया जा सके। बताया कि पुराने रेलवे स्टेशन का भी कायाकल्प किया जाना है। हालांकि, इस स्टेशन पर सिर्फ मालगाड़ियों की ही आवाजाही होगी। 

हरिद्वार रुकने वाली गाड़ियां पहुंचेंगी ऋषिकेश 

न्यू ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को एक टर्मिनल के रूप में तैयार किया जा रहा है। इस स्टेशन पर दस प्लेटफार्म होंगे, जिनमें इतनी ही ट्रेन एक बार में खड़ी हो सकती हैं। न्यू ऋषिकेश से यदि रेल गाड़ियों का संचालन शुरू हो जाता है तो हरिद्वार तक आने वाली अधिकांश गाड़ियों को ऋषिकेश से संचालित किया जा सकता है। यानी इस स्टेशन के तैयार होते ही ऋषिकेश से लंबी दूरी की रेल सेवाओं के संचालन की वर्षों पुरानी मुराद भी पूरी हो जाएगी। न्यू ऋषिकेश रेलवे स्टेशन देश का पहला ऐसा स्टेशन होगा, जिसमें एक से दूसरे प्लेटफार्म तक जाने के लिए अंडर ब्रिज होगा। रेल विकास निगम ने अब देशभर में बनने वाले सभी नए रेल स्टेशनों पर अंडर ब्रिज बनाने का निर्णय लिया है। 

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मेंटीनेंस फ्री तकनीकी का इस्तेमाल 

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की अधिकांश लाइन मेंटीनेंस फ्री तकनीकी से तैयार हो रही हैं। इसमें  रेल लाइन को समानांतर रखने के लिए बार-बार गिट्टी बिछाने और अन्य मरम्मत की ना के बराबर जरूरत पड़ती है। खासतौर पर सूरंगों के भीतर और परियोजना के सभी स्टेशनों पर इस तकनीकी का उपयोग किया जाएगा। बता दें कि 125 किमी लंबी इस रेल लाइन का करीब 105 किमी हिस्सा सूरंगों के भीतर ही रहेगा। 

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Posted By: Raksha Panthari

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