जागरण संवाददाता, देहरादून:

थानों में एफआइआर से लेकर चार्जशीट और फाइनल रिपोर्ट तक को ऑनलाइन करने से जुड़े कई सवालों का कई हेड मोहर्रिर जवाब नहीं दे पाए। इस पर पुलिस लाइन में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में आइजी गढ़वाल अजय रौतेला ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि थानों के कामकाज के वह सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं, ऐसे में यदि वही कार्य में दक्ष नहीं होंगे तो उसका असर पूरे थाने कामकाज पर पड़ेगा।

प्रशिक्षण में रेंज के 81 थानों से एक-एक हेड मोहर्रिरों ने हिस्सा लिया। उन्हीं के साथ रेंज के जिलों में हाल में तैनाती पाने वाले क्षेत्राधिकारियों को प्रशिक्षण कार्यशाला में थानों के कामकाज को बारीकी से समझने के लिए बुलाया गया था। आइजी ने उनके रोजमर्रा के कामकाज से जुड़े सवालों को पूछकर कार्यशाला की शुरुआत की। कई हेड मोहर्रिर के जवाब से असंतुष्ट आइजी ने कहा कि थानों के अभिलेख को ऑनलाइन अपडेट रखने में हेड मोहर्रिर की बड़ी भूमिका होती है, लिहाजा वह अपने कार्य की गंभीरता को समझ कर उसे समय से पूरा करें। इस दौरान उन्होंने जन शिकायतो के निराकरण और एवं दर्ज एफआइआर में विधिक निस्तारण के प्रति भी सतर्क रहने को कहा। उन्होंने शिकायतों का ऑनलाइन पंजीकरण, जीडी और सीडी को अनिवार्य तौर पर ऑनलाइन दर्ज करने के निर्देश दिए। वहीं, सीएम हेल्पलाइन पोर्टल (1905) पर आने वाली शिकायतों को भी गंभीरता से लेते हुए उसमें की जाने वाली कार्रवाई को लगातार अपडेट करने का भी निर्देश दिया।

दुर्घटना में 48 घंटे के भेजे रिपोर्ट

आइजी ने सड़क दुर्घटना के मामले में तत्काल एफआइआर दर्ज कर घटना की सूचना 48 घंटे के भीतर क्लेम ट्रिब्यूनल को भेजने का निर्देश दिया। इसके बाद पूरी जानकारी फार्म-54 में भरकर विवेचक द्वारा 30 दिन के भीतर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल को भेजी जाए। घटना के पीड़ित, गवाहों एवं मृत्यु की दशा में मृतक के परिजनों को न्यायालय में उपस्थित कराने की जिम्मेदारी थानेदार की होगी।

Posted By: Jagran

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