देहरादून, जेएनएन। नगर निगम की ओर से शहर में व्यापार पर श्रेणी के हिसाब से लगाए जा रहे लाइसेंस शुल्क का प्रदेश उद्योग व्यापार एवं उद्योग व्यापार मंडल समिति ने विरोध किया है। समिति ने कहा कि उन्हें यह शुल्क मंजूर नहीं। निगम ने जबरन शुल्क लागू किया तो व्यापारी हर मोर्चे पर इसका विरोध करेंगे।

इस संबंध में व्यापार मंडल की मंगलवार को लक्खीबाग में प्रदेश कार्यालय में बैठक हुई। जिसमें निगम द्वारा विभिन्न व्यापार पर प्रस्तावित लाइसेंस शुल्क पर चर्चा की गई। व्यापारियों ने कहा कि साल 2016 में जब जीएसटी लगाया गया था, उस वक्त केंद्र व राज्य सरकार ने भरोसा दिया था कि इसके बाद सभी तरह के शेष टैक्स से व्यापारियों को निजात मिल जाएगी। व्यापारियों ने कहा कि इसके बावजूद नगर निगम, श्रम विभाग और मंडी समिति की ओर से अलग-अलग लाइसेंस के नाम पर व्यापारियों को प्रताडि़त किया जा रहा।

आरोप लगाया कि व्यापार को पूर्ण लाइसेंस व इंस्पेक्टर राज की ओर धकेला जा रहा। व्यापार मंडल के महामंत्री विनय गोयल ने कहा कि व्यापारी वर्ग का उत्पीड़न किसी भी दशा में नहीं होने दिया जाएगा। महापौर सुनील उनियाल गामा से मुलाकात कर प्रस्ताव वापस लेने की मांग की जाएगी। बैठक में महावीर प्रसाद गुप्ता, राजकुमार अरोड़ा, पुनीत मित्तल एवं राजेंद्र प्रसाद गोयल समेत विनोद कुमार गोयल, अजय गर्ग, सुधीर अग्रवाल व मनीष गर्ग आदि मौजूद रहे।

इसके साथ ही बैठक में जनरल मर्चेंट्स एसोसिएशन, वनस्पति डीलर्स एसोसिएशन, दी होलसेल डीलर एसोसिएशन, आढ़त बाजार, देहरादून डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन, देहरादून ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन, झंडा बाजार व्यापार व्यापार संघ, टिंबर मर्चेंट एसोसिएशन, मार्बल एंड ग्रेनाइट्स व्यापार संघ व किराना मर्चेंट एसोसिएशन आदि के पदाधिकारी भी शामिल हुए।

शहरी विकास मंत्री को सौंपा ज्ञापन

लाइसेंस शुल्क के विरोध में उत्तराखंड नवनिर्माण सेना महानगर संयोजक बिजेंद्र रावत ने मंगलवार को शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को ज्ञापन देकर विरोध व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक व औद्योगिक विकास दर लगातार गिर रही है। पहले ही जीएसटी लागू है व ऑनलाइन व्यापार से खुदरा व्यापारियों को दोहरी हानि हो रही। इस दौरान दौरान सुनंदा थापा और सुनीता थापा समेत चतुर प्रसाद और राहुल कुमार आदि मौजूद रहे।

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वहीं, इस मामले में देहरादून सिटी बस सेवा महासंघ अध्यक्ष विजय वर्धन डंडरियाल ने भी नगर निगम के लाइसेंस शुल्क पर आपत्ति जताकर इसे निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सिटी बसों पर 10 हजार प्रति बस लाइसेंस शुल्क लगाना गलत है। बताया कि आरटीए व जिलाधिकारी द्वारा जब तक बस स्टाप व बस टर्मिनल का निर्धारण नहीं होता है, तब तक निगम सिटी बसों से शुल्क नहीं वसूल सकता है। इतना ही नहीं जहां लोनिवि की सड़के हैं, वहां नगर निगम को सिटी बसों से शुल्क वसूलने का अधिकार नहीं है।

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Posted By: Sunil Negi

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