जागरण संवाददाता, देहरादून : UKSSSC Paper Leak : पेपर लीक प्रकरण के बाद उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की ओर से पूर्व में आयोजित तीन भर्ती परीक्षाएं भी संदेह के घेरे में आ गई हैं। इसमें वन आरक्षी, सचिवालय सुरक्षा रक्षक व कनिष्ठ सहायक (न्यायिक) भर्ती परीक्षा शामिल है।

पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने शुक्रवार को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को इन भर्ती परीक्षाओं की जांच करने का निर्देश दिया। वन आरक्षी भर्ती परीक्षा की दोबारा जांच होगी। उपरोक्त तीन भर्ती परीक्षाओं में 1580 रिक्त पदों के लिए एक लाख 61 हजार 646 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी।

ब्लूटूथ से नकल करने का मामला इंटरनेट मीडिया में हुआ था वायरल

सबसे अधिक चर्चित वन आरक्षी परीक्षा रही थी। 16 फरवरी 2018 को शाम चार बजे परीक्षा की दूसरी पाली समाप्त हुई और पांच बजे ब्लूटूथ से नकल करने का मामला इंटरनेट मीडिया में वायरल होने लगा। अगले ही दिन पुलिस ने प्राप्त शिकायतों के आधार पर मामले दर्ज करने शुरू कर दिए और जांच के लिए एसआइटी का गठन किया।

इस प्रकरण में 18 आरोपितों को एसआइटी ने गिरफ्तार किया था। आरोपितों में हाकम सिंह रावत का नाम भी था, जो वर्तमान में यूकेएसएसएससी पेपर लीक प्रकरण में मुख्य आरोपित है और गिरफ्तार किया जा चुका है। वन आरक्षी परीक्षा गड़बड़ी में हाकम का नाम सत्ता प्रतिष्ठान में उसकी पैठ के चलते हटा दिया गया था।

हालांकि, बाद में शिकायतकर्ता और आरोपितों के बीच समझौता होने के बाद पुलिस ने आरोपितों को छोड़ने के साथ ही इस प्रकरण की फाइल बंद कर दी थी। सचिवालय सुरक्षा रक्षक के 33 पदों पर हुई थी भर्ती 26 सितंबर 2021 को सचिवालय सुरक्षा रक्षक के 33 पदों के लिए परीक्षा हुई थी। प

रीक्षा के लिए प्रदेश में 107 केंद्र बनाए गए थे। 25,805 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। छह महीने बाद परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया। 99 हजार अभ्यर्थियों ने दी थी वन आरक्षी परीक्षा 16 फरवरी 2018 को वन आरक्षी के 1218 पदों के लिए प्रदेश के 188 केंद्रों में लिखित परीक्षा हुई थी।

प्रदेश के 95 केंद्रों में आयोजित की गई थी परीक्षा

इस परीक्षा में 99,880 अभ्यर्थी उपस्थित रहे। परीक्षा दो पालियों में हुई थीं। परीक्षा में गढ़वाल मंडल के सात जिलों के 113 केंद्रों में 59,637 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जबकि कुमाऊं मंडल के छह जिलों में 75 परीक्षा केंद्रों पर 40,243 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। एक पद के लिए करीब 82 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी।

36 हजार अभ्यर्थी बैठे कनिष्ठ सहायक परीक्षा में एक व दो दिसंबर 2019 को उच्च न्यायालय नैनीताल के अधीन दीवानी और कुटुंब न्यायालयों में कनिष्ठ सहायक के 329 पदों के लिए लिखित परीक्षा कराई गई थी। इसमें 36,061 अभ्यर्थी शामिल हुए थे।

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की यह परीक्षा प्रदेश के 95 केंद्रों में आयोजित की गई। लिखित परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच की गई और परीक्षा के सात महीने बाद अंतिम मेरिट लिस्ट जारी कर सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी गई।

जांच एसटीएफ को सौंपना धामी सरकार का सराहनीय निर्णय

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने अधीनस्थ सेवा चयन की स्नातक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक प्रकरण के बाद अब पूर्व में हुई भर्तियों को लेकर लगे आरोपों की जांच भी एसटीएफ को सौंपने के धामी सरकार के निर्णय को सराहनीय कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह कदम भ्रष्टाचार को लेकर सरकार की जीरो टालरेंस की नीति को साबित करता है।

भाजपा नेता चौहान ने कहा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई में पार्टीजनों के साथ ही राज्य की जनता सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में तीव्र गति से जारी जांच और एक के बाद एक आरोपितों की गिरफ्तारी की चौतरफा प्रशंसा हो रही है।

इसी कड़ी में अब पूर्व में हुई सचिवालय रक्षक, कनिष्ठ सहायक व फारेस्ट गार्ड भर्ती की जांच भी एसटीएफ को सौंपा जाना सराहनीय है। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शी व ईमानदार नियुक्ति प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है।

उधर, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रविंद्र जुगरान ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पेपर लीक प्रकरण की सीबीआइ जांच का विकल्प खुला रखने का आग्रह किया। जुगरान के अनुसार मुख्यमंत्री ने विषय को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि सरकार ने सभी विकल्पों को खुला रखा है।

फिलहाल एसटीएफ की जांच से सरकार संतुष्ट है। भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर उत्तराखंड के हित में और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए सरकार कोई भी बड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।