देहरादून, [जेएनएन]: यह दीपावली दून के लिए प्रदूषण मुक्त दून की उम्मीद लेकर आई है। बेशक फिजा में पटाखों का शोर था, मगर इसका धुआं उम्मीदों को धूमिल नहीं कर पाया। पिछली दीपावली से तुलना करें तो इस दफा वायु प्रदूषण का ग्राफ औसतन 19.38 फीसद कम रहा। इसका असर यह हुआ कि ध्वनि प्रदूषण के ग्राफ में भी कमी रिकॉर्ड की गई।

दून में वायु प्रदूषण की बात करें तो इसका स्तर मानक (100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) से दोगुना तक पहले ही रहता है। दीपावली पर यह ग्राफ तीन-चार गुना तक बढ़ जाता है। इसी कारण वायु प्रदूषण का स्तर मापने के लिए पर्यावरण संरक्षण व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हर बार की तरह दीपावली पर घंटाघर, रायपुर रोड व नेहरू कालोनी की मॉनिटङ्क्षरग साइट के आंकड़े एकत्रित किए।

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जो परिणाम सामने आए, वह संतोष करने वाले हैं। पिछले साल दीपावली पर वायु प्रदूषण की जो स्थिति उच्च स्तर पर भी, इस दफा वह काफी कम पाई गई। आतिशबाजी के कानफोड़ू शोर में भी औसतन 2.26 फीसद की कमी दर्ज की गई। पटाखों का प्रयोग कम करने और ईको फ्रेंडली दीपावली मनाने के लिए जागरण ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी और अपेक्षा की थी कि दून पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझकर प्रदूषण के स्तर को कम करने में सहयोग करेगा।

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घाटी के लिए घातक है प्रदूषण
दून घाटी का आकार कटोरानुमा है। विशेष भौगोलिक बनावट के चलते जो भी वायु प्रदूषण उत्पन्न होता है, वह लंबे समय तक वायुमंडल में ही घूमता रहता है। इस लिहाज से देखा जाए तो दून में वायु प्रदूषण का स्तर कम रखना बेहद जरूरी है।
पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एसएस राणा ने बताया कि इस दीपावली पर प्रदूषण के आंकड़े बताते हैं कि लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। पिछले साल की अपेक्षा पटाखों का शोर कुछ कम हुआ। आने वाले सालों में प्रदूषण का ग्राफ और नीचे जाने के आसार हैं।

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Posted By: gaurav kala

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