जागरण संवाददाता, देहरादून: शिक्षकों की पदोन्नति के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत सरकारी डिग्री कॉलेजों में अब शिक्षकों को अनिवार्य रूप से प्रत्येक सेमेस्टर में 15 से 20 छात्र-छात्राओं की मॉनीटरिंग और उनका मार्गदर्शन भी करना होगा। यह व्यवस्था श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध 104 राजकीय महाविद्यालयों और एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि से जुड़े 18 अशासकीय कॉलेजों में प्रभावी होगी।

यूजीसी की नई गाइड लाइन के अनुसार विद्यार्थियों की कॅरियर काउंसलिंग और उनके गाइडेंस की जिम्मेदारी भी शिक्षकों की होगी। उनकी पृष्ठभूमि, मनोदशा आदि की जानकारी भी जुटाएंगे ताकि विद्यार्थी, शिक्षकों के और करीब आ सकें। इसके अंक शिक्षकों की पदोन्नति में जोड़े जाएंगे। यूजीसी की ओर से इसके निर्देश कॉलेजों को भेज दिए गए हैं। ऐसा न करने वाले शिक्षकों की पदोन्नति नहीं करने की व्यवस्था भी अमल में लाई जा रही है।

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सरकारी कॉलेजों के छात्र-छात्राओं के हितों व शिक्षकों की अधिक जवाबदेही के लिए यह नियम बनाया गया है। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए यह उपयोगी भी है। यूजीसी की ओर से अभी लिखित आदेश विवि को प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे ही आदेश मिलते है, इसे समस्त कॉलेजों पर लागू कर दिया जाएगा।

- डॉ.पीपी ध्यानी, कुलपति श्रीदेव सुमन विवि

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ग्रीन कैंपस के लिए मानक तय

यूजीसी ने इको फ्रेंडली एंड सस्टेनेबल कैंपस गाइड लाइन जारी की है। इसके अनुसार विवि और कॉलेज परिसर का 60 फीसद से ज्यादा हिस्सा हरा-भरा होना चाहिए। गाइडलाइन में जल संरक्षण, पौधरोपण, ऊर्जा संरक्षण व इको ट्रेवल सहित कई प्रावधान किए जा रहे हैं। इसके पीछे उद्देश्य है कि विवि या कॉलेज परिसर में ज्यादा से ज्यादा लोग पैदल चलें या साइकिल का प्रयोग करें। एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि के कुलसचिव डॉ. एसके झा ने कहा कि यूजीसी की ग्रीन कैंपस गाइड लाइन पर अमल किया जा रहा है।

Posted By: Jagran

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