v style="text-align: justify;">ऋषिकेश, [जेएनएन]: परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष व प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज को विश्व धर्म संसद में अहिंसा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान विश्व स्तर पर शांति और मानवता के लिए किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया है। 

कनाडा के टोरंटो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन (पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन) में मंगलवार को परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता और ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज को विश्व धर्म संसद के अध्यक्ष, डॉ. रॉबर्ट पी. सेलर्स, डॉ. किरीट दफ्तररी ट्रस्टी ने अहिंसा पुरस्कार प्रदान किया। आपको बता दें कि स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज विश्व स्तर पर जल, स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।
उनके मार्गदर्शन में विश्व स्तर पर कार्य करने वाला जीवा संगठन पहला ऐसा गठबंधन है, जो विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु को एक मंच पर लाकर बहुउद्देशीय कार्यों को अंजाम दे रहा है। इसके साथ ही स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज गंगा एक्शन परिवार के माध्यम से स्वच्छ गंगा आंदोलन, डिवाइन शक्ति फाउंडेशन के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कार्य कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में हिन्दू धर्म विश्वकोश के रूप में अमूल्य ग्रंथ का प्रकाशन हो चुका है। 
स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सत्य और अहिंसा की व्यावहारिक बुनियाद रखना ही सच्ची साधना है। उन्होंने कहा कि धरती को बचाना है तो जल, मृदा और पर्यावरणरूपी धरोहर को बचाना होगा। कार्यक्रम में डिवाइन शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष व जीवा की अंतरराष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि अहिंसा का तात्पर्य हिंसा की अनुपस्थिति नहीं बल्कि शांति की पूर्णता के साथ सभी को गले लगाना और मानवता के लिए एकजुट होकर कार्य करना है। विश्व धर्म संसद में आयोजित कार्यक्रम में 80 धार्मिक क्षेत्रों के 85 देशों के दस हजार लोगों ने सहभागिता की।

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