देहरादून, रविंद्र बड़थ्वाल। तेजी से बेतरतीब शहरीकरण, नदी-नालों व सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण ने उत्तराखंड के भूमि बंदोबस्त का भूगोल बिगाड़ दिया। कपड़े की पुरानी शीट पर भूमि बंदोबस्त के मौजूदा नक्शे खुद राजस्व महकमे को समझ से बाहर हैं। नजारा देखिए, सिंचाई महकमा अपने नदी-नालों, जलस्रोतों की हदबंदी ढूंढ रहा है तो आवास महकमे को कारगर मास्टर प्लान बनाने को भूमि का सही नक्शा चाहिए। महकमे नक्शों को लेकर अपनी जरूरत चिह्नित करेंगे। राज्य सरकार सर्वे ऑफ इंडिया से पूरे प्रदेश की नए सिरे से डिजिटल मैंपिंग कराने जा रही है। इस पर सहमति बनी है।

प्रदेश के चुनिंदा हिस्सों में भूमि बंदोबस्त की डिजिटल मैपिंग पर काम हो रहा है। अब इसका दायरा बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। वजह राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में भूमि के पुराने सजरे (नक्शे) के नक्श बदल चुके हैं। इन्हें सिरे से बनाने की दरकार है। बड़े भूभाग अब छोटे भूखंडों, बस्तियों की शक्ल ले चुके हैं। भूमि बंदोबस्त के पुराने नक्शों के बूते योजनाओं को परवान चढ़ाने में महकमों को दिक्कत होने लगी है। सबसे ज्यादा परेशान खुद राजस्व महकमा है। सजरों को मिलान करना उसके लिए दूभर हो चुका है।

शहरी विकास महकमे ने 92 नगर निकाय तो बना लिए, लेकिन ड्रेनेज समेत बुनियादी सुविधाएं जुटाने के लिए उसे भी सही नक्शा चाहिए। कमोबेश यही हालत सिंचाई और वन महकमों की है। उसके पास नदियों-नालों, जलस्रोतों के मौजूदा स्वरूप के नक्शे हैं ही नहीं। महकमों की इन जरूरतों को देखकर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने उन्हें भूमि संबंधी नक्शों को लेकर अपनी जरूरत चिह्नित कर जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

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राजस्व सचिव सुशील कुमार ने बताया कि पूरे प्रदेश का नए सिरे से डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा। यह कार्य सर्वे ऑफ इंडिया से कराने पर प्रारंभिक सहमति बन चुकी है। सर्वे ऑफ इंडिया और शासन के बीच इस संबंध में बैठक हो चुकी है। महकमों से प्रस्ताव मिलने पर इस संबंध में आगे कदम बढ़ाए जाएंगे।

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