जागरण संवाददाता, देहरादून: सरकारी विभागों में हुई नियुक्तियों में धांधली पर राज्य आंदोलनकारी भी मुखर हो गए हैं। उन्होंने इसे युवाओं के साथ धोखा बताया। आंदोलनकारियों ने धरना-प्रदर्शन कर मामले की सीबीआइ जांच की मांग की है। प्रदर्शन में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

30 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान की उठाई मांग

उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के बैनर तले बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी गुरुवार को गांधी पार्क के मुख्य द्वार पर एकत्रित हुए। यहां नारेबाजी करते हुए उन्होंने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राज्य में महिलाओं को सरकारी नौकरी में 30 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान होना चाहिए।

प्रशासन को भेजा ज्ञापन

साथ ही यूकेएसएसएससी की परीक्षाओं में हुए घपले समेत विधानसभा बैकडोर से हुई भर्तियों की सीबीआइ जांच होनी चाहिए। आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, बेरोजगार संघ के बाबी पंवार, संयुक्त नागरिक संगठन के ब्रिगेडियर केजी बहल के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं ने तहसीलदार के माध्यम से प्रशासन को ज्ञापन प्रेषित किया। उन्होंने कहा कि राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने और बेरोजगारों का भविष्य बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भर्ती घोटाला की सुप्रीम कोर्ट के जज की देखरेख में सीबीआइ जांच कराएं।

भविष्य में इस तरह नेताओं को चुनाव न लड़ाया जाए

आंदोलनकारी रामलाल खंडूड़ी और प्रदीप कुकरेती ने कहा कि जिन प्रतिनिधियों का नाम किसी भी भर्ती से जुड़ा है, उनसे तत्काल इस्तीफा मांगकर हटाया जाए एवं भविष्य में ऐसे नेताओं को चुनाव न लड़ाया जाए। द्वारिका बिष्ट और सुलोचना भट्ट ने कहा कि अब प्रदेश को बचाने के लिए फिर राज्य आंदोलनकारियों के साथ ही छात्र शक्ति भी जाग चुकी है।

इस दौरान प्रभात ध्यानी, द्वारिका प्रसाद उनियाल, हरजिंदर सिंह, पूरण सिंह लिंगवाल, लुसुन टोडरिया, गणेश धामी, मोहन सिंह रावत, सुशील चमोली, स्वरूप जोशी, पंचम सिंह बिष्ट, महेश जोशी, केशव उनियाल, मनमोहन सिंह नेगी आदि उपस्थित रहे।

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Edited By: Sumit Kumar

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