राज्य ब्यूरो, देहरादून: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश वासियों से अपनी छतों का प्रयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए करने को कहा है। उन्होंने कहा कि लोग 10 किलोवाट तक की योजना स्थापित कर सकते हैं। इसका खर्च पांच लाख रुपये आता है लेकिन सब्सिडी के बाद यह खर्च 3.60 लाख रुपये आएगा। इस ऊर्जा को ग्रिड के माध्यम से बेचने पर आय का स्रोत भी विकसित होगा।

बुधवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित कार्यालय में ग्रिड कनेक्टेड रूफ टॉप सोल फेज-2 योजना एवं एकीकृत रूफ टॉप पोर्टल की शुरुआत मुख्यमंत्री ने की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में गांधीनगर के साथ ही देहरादून को ग्रीन सिटी के रूप में चिह्नित होना प्रसन्नता का विषय है। इससे प्रदेश में पर्यावरण के प्रति जागरूकता के प्रयास व पर्यटन प्रदेश के सपने को साकार करने में मदद मिलेगी। उन्होने कहा कि प्रदेश में सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा के विद्युत उत्पादन पर ध्यान दिया जा रहा है। देहरादून व हरिद्वार के सरकारी भवनों में इसकी शुरुआत की गई है। इससे 2.75 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन होगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में 268 मेगावाट सोलर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। 200 मेगावाट के सोलर ऊर्जा उत्पादन का आवंटन किया जा चुका चुका है। इसके अलावा 200 मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर उत्पादन के लिए करार हो चुका है।

सचिव ऊर्जा राधिका झा ने बताया कि प्रदेश को हरित ऊर्जा में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। इसके लिए 800 करोड़ की निवेश योजनाएं धरातल पर उतारी जा रही हैं। आम लोगों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए 15 वेंडर विभाग में जोड़े गए हैं।

कार्यक्रम में प्रबंध निदेशक यूपीसीएल वीसीके मिश्रा ने योजना की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत, विधायक गणेश जोशी, सहदेव पुंडीर, राजकुमार ठुकराल, मेयर सुनील उनियाल गामा व अपर सचिव ऊर्जा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी आदि मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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