चकराता, चंदराम राजगुरु। बर्फबारी ने इस बार देहरादून जिले के जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में इतिहास रच दिया। देवघार खत की अटाल पंचायत में पहली बार बर्फबारी होने से लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लाखामंडल में पांडवकालीन शिव मंदिर के शिखर (भीम छतरी) पर 22 साल बाद बर्फ पड़ने से कारसेवकों ने मंदिर में बकरा चढ़ाया।

हनोल स्थित सिद्धपीठ श्री महासू देवता मंदिर के शिखर पर बीस साल बाद बर्फ पड़ने की खुशी में परपंरानुसार बकरा चढ़ाया गया। इस दौरान मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद विशेष पूजा-अर्चना की गई। जनजातीय क्षेत्र के कई ग्रामीण इलाकों में अरसे बाद बर्फबारी का मनमोहक नजारा देखने को मिला। टोंस घाटी के निचले इलाकों में हिमपात होने से लोगों के चेहरे खिल उठे।

 

सीमांत देवघार खत के अटाल पंचायत में लोगों ने पहली बार बर्फ गिरते देखी और वह घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय व्यापार मंडल सचिव श्रीचंद शर्मा, फतेह सिंह राणा, पूर्व प्रधान सुमन शर्मा, ग्रामीण युवा समिति अध्यक्ष बसंत शर्मा व दुलाराम शर्मा ने बताया कि अटाल में पहली बार बर्फ पड़ने की खुशी में लोगों ने तांदी नृत्य कर जश्न मनाया। इसी तरह नया बाजार त्यूणी के गुतिखाखाटल व गेट बाजार में लोगों ने 25 साल बाद बर्फबारी का नजारा देखा।

पांडवकालीन शिव मंदिर लाखामंडल के पुजारी नरेश बहुगुणा ने बताया कि इससे पहले पांच जनवरी 1998 को लाखामंडल में प्राचीन शिव मंदिर के शिखर पर बर्फ पड़ी थी। इस बार बर्फ पड़ने पर मंदिर में परपंरानुसार बकरा चढ़ाया गया। सिद्धपीठ श्री महासू देवता मंदिर हनोल में भी इसी परंपरा का निर्वहन किया गया।

बकरा चढ़ाने के बाद मंदिर की विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा की गई और फिर विशेष पूजा-अर्चना हुई। लाखामंडल मंदिर के पुजारी नरेश बहुगुणा, प्यारेलाल भट्ट, पूर्व प्रधान सुरेश शर्मा व हनोल मंदिर समिति के सचिव मोहनलाल सेमवाल ने कहा खुशी मनाने का ऐस विलक्षण मौका वर्षों बाद मिलता है।

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भीम छतरी पर पड़ी बर्फ खुशहाली का प्रतीक

प्राचीन शिव मंदिर लाखामंडल व महासू देवता मंदिर हनोल में भीम छतरी के ऊपर बर्फ पड़ने को लोग शुभ संकेत मानते हैं। मान्यता है कि नागर शैली में बने हनोल व लाखामंडल मंदिर के शिखर पर भीम ने हिमालय के घाटा पर्वत लाकर शिला रखी थी। इस पर बर्फ पड़ने से समूचे इलाके में खुशहाली आती है और कृषि, बागवानी व पशुपालन व्यवसाय में उन्नति आती है।

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