चंदराम राजगुरु, त्यूणी:

जनवरी की बर्फबारी फसलों की अच्छी पैदावार की उम्मीद के साथ खुशियों की सौगात लेकर आई है। मौसम की अच्छी बर्फबारी से कृषि-बागवानी पर निर्भर जौनसार-बावर के करीब 15 हजार बागवानों के लिए बेहद सुखद संदेश दे रही है। बीते वर्ष सेब उत्पादन कम होने से निराश बागवानों के चेहरे मौसम की मेहरबानी से खिल उठे हैं। उन्हें इस बार फसलों के उत्पादन में इजाफा होने की उम्मीद है।

देहरादून जनपद के सबसे अधिक सेब उत्पादन वाले सीमांत तहसील त्यूणी और चकराता क्षेत्र में ग्रामीण परिवारों की आजीविका कृषि-बागवानी से चलती है। कृषि-बागवानी को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने चौसाल, त्यूणी, कोटी-कनासर और चकराता में चार राजकीय उद्यान सचल दल केंद्र खोले हैं। इन केंद्रों से बागवान पर्वतीय फलों का उत्पादन कर अपनी आर्थिकी संवार रहे हैं। बागवानी में अग्रणी त्यूणी और चकराता क्षेत्र में प्रतिवर्ष सेब का उत्पादन मायने रखता है। पिछली बार मौसम के साथ नहीं देने से सेब उत्पादन में गिरावट आई थी, जिससे बागवानों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार जनवरी में मौसम की चौथी बर्फबारी से फिलहाल बागवान आश्वस्त हैं। स्थानीय बागवान राजपाल सिंह राणा, पितांबर दत्त बिजल्वाण, अतर सिंह चौहान, विजयपाल सिंह रावत, रमेश चौहान, जगतराम नौटियाल, फतेह सिंह चौहान आदि ने कहा कि बर्फबारी सेब और अन्य पर्वतीय फलों के लिए बेहद फायदेमंद है। सेब और अन्य फसलों की पैदावार अच्छी रहने की उम्मीद है। अगर मौसम ने आगे भी साथ दिया तो सेब के उत्पादन में पहले के मुकाबले डेढ़ से दो गुना इजाफा होगा। जानकारों की माने तो इस बार क्षेत्र के ऊंचे इलाकों में हुई अच्छी बर्फबारी कृषि-बागवानी के लिए किसी वरदान से कम नहीं।

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क्षेत्र के इन इलाकों में है सेब के बगीचे

जौनसार-बावर की सीमांत त्यूणी और चकराता तहसील से जुड़े बावर खत, शिलगांव, फनार, देवघार, लखौ, बाणाधार , मशक, भरम, कंडमाण खत समेत करीब डेढ़ सौ गांवों में प्रत्येक ग्रामीण परिवार के पास सेब के बगीचे हैं। चकराता सचल केंद्र के सहायक उद्यान निरीक्षक चंद्रराम नौटियाल, कोटी-कनासर केंद्र के सहायक उद्यान निरीक्षक धीर सिंह चौधरी और त्यूणी-चौसाल केंद्र के सहायक उद्यान निरीक्षक पप्पन यादव ने कहा कि क्षेत्र में संचालित हो रहे उद्यान सचल केंद्र में करीब 15 हजार बागवान पंजीकृत है, जिन्हें विभाग ने उद्यान कार्ड निर्गत किए हैं। क्षेत्र में सेब की स्पर, रेड डेलीसियस, रायल डेलीसियस, गोल्डन डेलीसियस और रुट स्टाक की कुछ अन्य प्रजातियां हैं। यहां सेब का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। इसके अलावा यहां पर्वतीय फलों में आडू, खुमानी, नाशपाती, पुलम, अखरोट व अन्य फलों का उत्पादन भी अच्छी मात्रा में होता है।

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क्षेत्र में सेब का उत्पादन वर्षवार

अगर उद्यान विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले चार साल में जौनसार-बावर के उद्यान सचल केंद्र चकराता में वर्ष 2017-18 से लेकर 2020-21 के बीच यहां आठ सौ से 12 सौ मीट्रिक टन के बीच सेब उत्पादन रहा। इसी तरह सचल केंद्र कोटी-कनासर में 14 सौ से 21 सौ मेट्रिक टन के बीच और सचल केंद्र त्यूणी व चौसाल में दोनों जगह 15 सौ से लेकर 27 सौ मीट्रिक टन के बीच सेब उत्पादन रहा।

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क्या कहते हैं जानकार

जौनसार में कृषि-बागवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित अटाल पंचायत निवासी प्रगतिशील किसान प्रेमचंद शर्मा ने कहा कि जनवरी की बर्फबारी और बारिश कृषि एवं बागवानी के लिए सबसे अधिक फायदेमंद रहेगी। समय पर अच्छी बर्फबारी होने से पहाड़ में सेब और अन्य कृषि फसलों के उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को कृषि-बागवानी में बेहतर उत्पादन से लाभ होगा। इसके अलावा पानी की कमी से सूख रहे कई ग्रामीण इलाकों के जल स्त्रोतों को भी नया जीवन मिलेगा। बर्फबारी से पहाड़ के स्त्रोत दोबारा रिचार्ज होने से गर्मी के दिनों में पेयजल की समस्या नहीं रहेगी। अच्छी बर्फबारी से सेब बगीचों में लंबे समय तक नमी रहेगी। मौसम की इस बर्फबारी से सेब बगीचों में फलों के उत्पादन को पर्याप्त खाद मिलेगी, जिससे फलों के उत्पादन में इजाफा होने की संभावना है।

Edited By: Jagran