देहरादून, राज्य ब्यूरो। राजाजी टाइगर रिजर्व से लगे हरिद्वार के पथरी क्षेत्र में हाथी के हमले में दो लोगों की मौत की घटना के बाद बिगड़ैल हाथियों को चिह्नित किया जा रहा है। अभी तक अलग-अलग झुंडों के ऐसे छह हाथी चिह्नित किए गए हैं। निगरानी के लिए इन पर भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) के सहयोग से रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी है। 

इस सिलसिले में डब्ल्यूआइआइ के वैज्ञानिकों और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के मध्य मंगलवार को रणनीति पर मंथन किया गया। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक राजीव भरतरी ने बताया कि निगरानी के लिए हाथियों पर जल्द ही रेडियो कॉलर लगाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

हरिद्वार क्षेत्र के 30 गांव हाथी समेत दूसरे वन्यजीवों के खौफ से त्रस्त हैं। आए दिन जंगल की देहरी पार कर हाथी आबादी वाले इलाकों में घुस आफत खड़ी करते आ रहे हैं। हाल में हाथी ने पथरी क्षेत्र के पिंजनहेड़ी गांव में दो लोगों को मार डाला था। इसके बाद से पूरे इलाके में दहशत है। हालांकि, ऐहतियात के तौर पर क्षेत्र में टीमें तैनात हैं, लेकिन अब इस समस्या से पार पाने के लिए महकमा गंभीर हुआ है।

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक राजीव भरतरी के अनुसार हरिद्वार क्षेत्र में हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाकर उनकी निगरानी का निर्णय लिया गया है। इसके लिए डब्ल्यूआइआइ के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा चुकी है। इस कड़ी में मंगलवार को डब्ल्यूआइआइ के वन्यजीव वैज्ञानिकों के साथ रेडियो कॉलरिंग को लेकर रणनीति पर विमर्श किया गया।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में अभी तक हाथियों के छह झुंड चिह्नित किए गए हैं, जिनका कोई न कोई हाथी अक्सर आबादी वाले इलाके में धमकता है। प्रथम चरण में इन्हीं छह झुंडों के चिह्नित हाथी को रेडियो कॉलर लगाया जाएगा, ताकि उनके व झुंड के मूवमेंट पर नजर रख लोगों को आगाह करने के साथ ही इन्हें जंगल की तरफ खदेडऩे को कदम उठाए जा सकें। इसके अलावा अन्य झुंड भी चिह्नित किए जाएंगे, ऐसे में जिन हाथियों को रेडियो कॉलर लगाए जाने हैं, उनकी संख्या बढ़ सकती है।

नए क्षेत्रों में भी मजबूत सोलर फैंसिंग

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने बताया कि पूर्व में हरिद्वार के बीएचईएल क्षेत्र में हाथी ने उत्पात मचाया था। वहां वन सीमा पर करीब ढाई किमी क्षेत्र में मजबूत सोलर फैंसिंग लगाई गई, जिससे हाथियों का आवागमन रुका है। अलबत्ता, हाथियों ने दूसरी तरफ से आवाजाही शुरू की है। ऐसे सभी स्थल चिह्नित कर वहां भी ऐसी ही सोलर फैंसिंग लगाई जाएगी।

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छत्तीसगढ़ के अनुभवों का भी लेंगे लाभ

उत्तराखंड की भांति पूर्व में छत्तीसगढ़ के तमाम इलाके भी हाथियों के खौफ से त्रस्त थे। इसके लिए वहां इससे निजात पाने को तमाम कदम उठाए गए, जिसके सकारात्मक नतीजे आए हैं। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के अनुसार छत्तीसगढ़ में हुए उपायों का अध्ययन कर इन्हें यहां भी धरातल पर उतारा जाएगा। 

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Posted By: Bhanu

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