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देहरादून MBBS दाखिला फर्जीवाड़ा: मूल रिकॉर्ड ही नहीं था तो कैसे जारी हुआ प्रमाणपत्र? सरकारी प्रक्रिया पर सवाल

Published: Tue, 22 Sep 2026 08:29 AM (IST)

देहरादून एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़े में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच अब सरकारी प्रक्रिया पर केंद्रित ...और पढ़ें

एसआईटी टीम की जांच का फाइल फोटो।

एसआईटी टीम की जांच का फाइल फोटो।

HighLights

  1. एमबीबीएस फर्जीवाड़े में स्वतंत्रता सेनानी प्रमाणपत्रों की सरकारी प्रक्रिया की जांच।

  2. एसआईटी ने एसडीएम, एडीएम कार्यालय से पत्रावलियां जब्त कर जांच तेज की।

  3. मूल रिकॉर्ड न होने पर भी प्रमाणपत्र जारी होने पर सवाल उठे।

अंकुर अग्रवाल, देहरादून। एमबीबीएस दाखिले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के फर्जीवाड़े की जांच अब फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वालों से आगे बढ़कर उस सरकारी प्रक्रिया पर टिक गई है, जिसके जरिए ये प्रमाणपत्र वैध दस्तावेज बनकर सामने आए। एसआइटी ने एसडीएम सदर और एडीएम कार्यालय की पत्रावलियां कब्जे में लेकर यह जवाब तलाश रही कि आवेदन से लेकर सत्यापन और प्रमाणपत्र जारी होने तक फाइल किन-किन अधिकारियों की मेज से गुजरी।

मामले में अब तक सामने आया है कि संबंधित प्रमाणपत्रों के आधार पर एमबीबीएस में प्रवेश लिया गया। प्रशासनिक रिकॉर्ड में जिस स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर के नाम का इस्तेमाल किया गया, उसके रिकार्ड पर भी सवाल खड़े हुए हैं। एसआइटी ने धर्मवीर के पुत्र व पौत्र के बयान दर्ज किए हैं। संबंधित पटवारी से भी पूछताछ हो चुकी है।

अब जांच का सवाल यह है कि आवेदक ने जो दस्तावेज लगाए, उनका पहला सरकारी सत्यापन किसने किया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में आवेदन के साथ स्वतंत्रता सेनानी का मूल प्रमाणपत्र/कार्ड, पेंशन संबंधी दस्तावेज, निवास प्रमाण और आवेदक से संबंध दर्शाने वाली वंशावली जैसे दस्तावेज आवश्यक होते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार राजस्व स्तर पर जांच के बाद मामला आगे बढ़ता है और सक्षम स्तर से प्रमाणपत्र जारी होता है।

पटवारी से आगे बढ़ेगी जांच

एसआइटी पहले ही तत्कालीन जांचकर्ता पटवारी के बयान दर्ज कर चुकी है। एसडीएम और एडीएम कार्यालय से कब्जे में लिए दस्तावेजों का मिलान प्रमाणपत्रों में दर्ज तथ्यों और मेडिकल दाखिले के समय जमा दस्तावेजों से किया जा रहा है। यानी जांच का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव हस्ताक्षर की जवाबदेही होगा।

किस अधिकारी ने किस रिपोर्ट के आधार पर फाइल आगे बढ़ाई, किस स्तर पर आपत्ति नहीं उठी व अंतिम प्रमाणपत्र जारी करते समय संबंधित अधिकारी के सामने कौन-कौन से मूल दस्तावेज थे। इन सवालों के जवाब फाइलों से निकलेंगे।

ऑनलाइन आवेदन भी खोलेगा पूरी कड़ी

एमबीबीएस दाखिले की प्रक्रिया आनलाइन होने के कारण अभ्यर्थियों के आवेदन, दस्तावेज अपलोड करने का समय, मोबाइल नंबर, ईमेल और अन्य तकनीकी विवरण का रिकॉर्ड मौजूद है। पुलिस इस डिजिटल कड़ी को भी देख रही है। यदि एक से अधिक आवेदनों में समान मोबाइल नंबर, ईमेल, दस्तावेज या अपलोड करने का पैटर्न मिलता है तो यह प्रमाणपत्र तैयार कराने वाले नेटवर्क तक पहुंचने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

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