देहरादून, निशांत चौधरी। इन दिनों प्रदेश के सभी खेल परिसरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। कोरोना वायरस के संक्रमण से खिलाड़ियों को बचाने के लिए सरकार ने प्रदेश के स्पोर्ट्स कॉलेज, छात्रवास, खेल परिसरों की छुट्टी कर दी है। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के बीच सत्र में भी कॉलेज बंद करना पड़ा। 

इतना ही नहीं एक्सीलेंस सेंटरों के खिलाड़ियों को सुरक्षा दृष्टि से घर भेज दिया है। वहीं, जिला खेल कार्यालयों की ओर से आयोजित हो रहे प्रशिक्षण शिविर भी स्थगित कर खिलाड़ियों को घर भेज दिया है। ठसाठस रहने वाला परेड ग्राउंड आज सुनसान पड़ा है। हालांकि यह गतिविधियां संचालित न करना खिलाड़ियों सहित तमाम लोगों के हित में है। 

यह व्यवस्था अगर आगे भी जारी रहे तो इससे बनाने में खेल प्रशासन सहित संबंधित विभाग सहयोग दें। क्योंकि हमारा मैच इस समय कोरोना से है और इस मैच को हमने सभी के सहयोग से जीतना ही जीतना है।

खेल गतिविधियों पर रोक 

कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते बीसीसीआइ ने अपने घरेलू सत्र पर रोक लगा दी। जिससे दून में 19 मार्च से होने वाले विज्जी ट्रॉफी टूर्नामेंट भी स्थगित हो गया। इसके अलावा क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड ने भी प्रदेश की सभी क्रिकेट गतिविधियों पर रोक लगा दी है। 

यह नहीं बताया कि प्रदेश में कौन से टूर्नामेंट होने थे, जिनपर रोक लगाई गई हैं। दरअसल सच्चाई तो यह है कि सीएयू से संबद्ध जिला क्रिकेट संघों ने लचर कार्यशैली के चलते अभी तक अपने क्रिकेट कैलेंडर ही जारी नहीं किए हैं। जिस कारण इस बार क्रिकेट गतिविधियां लगातार लेट हो रही है।

नवंबर-दिसंबर में दून में शुरू होने वाली जिला क्रिकेट लीग का मार्च तक भी कुछ अता पता नहीं है। ऐसे में अगर क्रिकेट गतिविधियां अगर स्थगित नहीं होती तब भी यह समय पर संभव नहीं थी। इससे सभी जिला संघों की कार्यप्रणाली भी सवालों उठ रहे हैं।

कोरोना ने दिया दखल 

सुबे में 2021 में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन होना है। सरकार ने नेशनल गेम्स के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की अवस्थापनाएं विकसित करने के लिए प्रदेश के अलग अलग राज्यों में जगह चिह्नित कर बजट का भी प्राविधान कर दिया है। 

विश्वभर में फैली महामारी की तरह फैल रहे लाइलाज कोरोना वायरस ने राष्ट्रीय खेलों के आयोजन की तैयारियों पर भी ब्रेक लगा दिए है। इसमें अवस्थापनाओं के साथ खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण दिलवाने के लिए विदेशी कोच उत्तराखंड लाए जाने थे। लेकिन सब स्थगित है। राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के बजट में केंद्र सरकार की भी भागीदारी करनी है। 

इस संदर्भ में भी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में विभागीय मंत्री व अधिकारियों को केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ मीटिंग करनी थी। वह भी लटकी पड़ी है इसके अलावा खेल गांव बनाने के लिए ब्लूप्रिंट, प्रदेश में पूर्व से मौजूद अवस्थापनाओं के विस्तार का कार्य भी लटका हुआ है।

घरों में कैद खिलाड़ी

खिलाड़ियों को भी इन दिनों कोरोना वायरस ने घरों में कैद कर दिया है। लेकिन खिलाड़ी भी हार मानने वाले हैं। खेल के प्रति जुनून व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों ने अपने घरों में ही अभ्यास करना शुरू कर दिया है। बैडमिंटन से जुड़े खिलाड़ी ने अपने घरों की छत व आंगन में नेट लगाकर प्रैक्टिस कर रहे हैं, वहीं क्रिकेटर घरों में बॉल लटकाकर अपने शॉट की प्रैक्टिस करने में लगे हैं। 

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इसके अलावा फुटबॉलर भी घरों में ही अपनी तैयारी में जुटे हुए हैं। हालांकि इसमें खिलाड़ियों के अभिभावक भी उनका पूरा साथ दे रहें हैं। खिलाड़ियों के माता-पिता घर पर ही उनको सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं ताकि खिलाड़ियों की लय बरकरार रहे। हालांकि जान है तो जहान है, जिंदगी रहेगी तो खेल तो खेला जाता रहेगा। इन दिनों महामारी से बचने को घर में रहना आवश्यक है। इसलिए इस पाबंदी को निभाना जरूरी है।

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