देहरादून, जेएनएन। Shardiya Navratri 2020 नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की गई। पंडित बालकृष्ण शास्त्री के मुताबिक ब्रह्मचारिणी ब्रह्म शक्ति यानी तप की शक्ति का प्रतीक है। इनकी आराधना से भक्तों की तप करने की शक्ति बढ़ती है। इस देवी की कथा का सार है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए।  

शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने व्रत रख मां का आशीर्वाद मांगा। मंदिरों में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने व्रत रख सुख समृद्धि, आरोग्य के साथ वैश्विक महामारी कोरोना से मुक्ति की कामना की। इससे पहले शुभ मुहूर्त पर घरों पर घटस्थापना कर माता की चौकी सजाकर पूजा हुई। 

कैसे करें मां ब्रह्मचारिणा की पूजा    

सुबह स्नान कर नए और साफ सुथरे क पड़े पहन लें। फिर आसन पर बैठ मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करें। उन्हें फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि अर्पित करें। इसके साथ ही मां ब्रह्मचारिणी को दूध, दही, घृत, मधु और चीनी से स्नान कराएं। इसके बाद मां को पिस्ते की मिठाई का भोग लगाएं। फिर उन्हें पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें। मां के मंत्रों का जाप करें और आरती करें।

 

मां शैलपुत्री की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना  

शारदीय नवरात्र के पहले दिन दुर्गा के प्रथम रूप मां शैलपुत्री की आराधना कर भक्तों ने व्रत का संकल्प लेकर सुख समृद्धि, आरोग्य के साथ वैश्विक महामारी कोरोना से मुक्ति की कामना की। शुभ मुहूर्त पर घरों पर जहां घटस्थापना कर माता की चौकी सजाकर पूजा हुई। वहीं, मंदिरों में भी भक्तों ने मां की आरती कर आशीर्वाद लिया। देर शाम को भजन संध्या में माता के भजनों पर भक्त खूब झूमे।

मां शैलपुत्री की आराधना करने के साथ ही शनिवार से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो गई है। पहले दिन मंदिरों में माता के दर्शन और आरती के लिए भक्त सुबह से दोपहर तक आते जाते रहे। डाटकाली मंदिर, पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर, सनातन धर्म मंदिर प्रेमनगर, वैष्णो देवी गुफा योग मंदिर टपकेश्वर, माता स्वर्गापुरी मंदिर निरंजनपुर, दुर्गा मंदिर सर्वे चौक, श्याम सुंदर मंदिर पटेलनगर, कालिका माता मंदिर अंसारी मार्ग समेत शहर के मंदिरों में प्रतिमा को पवित्र गंगाजल से स्नान कराने के बाद, नए वस्त्र आभूषण धारण कराए गए।

इसके बाद विशेष पूजा-अर्चना के साथ घट स्थापना हुई और खुशहाली और हरियाली के प्रतीक जौ बोए। माता के श्रृंगार के बाद शाम को आरती हुई। सेवादारों ने कोविड-19 के नियमों का पालन करवाते हुए भक्तों को दर्शन के लिए प्रवेश दिया। मंदिरों में प्रतिमा को न छूने और प्रसाद न चढ़ाने की अपील पर भक्तों ने दूर से ही दर्शन कर माता का आशीर्वाद लिया।

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डाटकाली मंदिर पहुंच लिया मां का आशीर्वाद 

डाटकाली मंदिर में शनिवार सुबह से ही भक्त दूर दूर से मां का आशीर्वाद लेने पहुंचे। दोपहर को माता के श्रृंगार के बाद पंडितों ने विशेष आरती की। महंत रमन गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में कोरोना से मुक्ति के लिए भी पंडितों ने पूजा की। कोरोनाकाल को देखते हुए फिलहाल खुला भंडारा न करने, बच्चों और बुजुर्ग और बीमार से घर पर ही पूजा करने की अपील की जा रही है।

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