जागरण संवाददाता, देहरादून : बेसिक से एलटी में समायोजित-प्रोन्नत किए गए शिक्षकों को करीब 12 वर्षों से चयन प्रोन्नत वेतनमान नहीं मिल रहा है, जिससे राज्यभर के सात हजार शिक्षकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

राजकीय एलटी समायोजित-पदोन्नत शिक्षक संघर्ष मंच के प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर फुलोरिया ने शनिवार को प्रेस को जारी बयान में कहा कि वर्ष 2009 में बेसिक शिक्षा से योग्यताधारी शिक्षकों को एलटी में समायोजित और पदोन्नत किया गया था, मगर उनको इसका कोई लाभ नहीं दिया गया।

करीब 12 वर्ष की संतोषजनक सेवा करने के बाद मिलने वाले चयन प्रोन्नत वेतनमान स्वत: लाभ से भी शिक्षकों को वंचित रखा गया है। तर्क दिया कि यदि ये समायोजित शिक्षक प्राथमिक जूनियर हाईस्कूल में ही रहते तो इनको चयन प्रोन्नत वेतनमान स्वत: मिल चुका होता। उन्हें गिड़गिड़ाने की जरूरत नहीं पड़ती। स्नातक एलटी योग्यताधारी बेसिक शिक्षा से समायोजित-पदोन्नत शिक्षकों में इस अनदेखी को लेकर आक्रोश है। कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिक्षकों को बड़ी उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने भी झुनझुना थमाकर निराश किया। चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के पश्चात शिक्षक प्रदेशभर में आंदोलन छेड़ेंगे। मंच के प्रदेश महामंत्री राजपाल सिंह रावत ने बताया कि मंच ने पदोन्नति का शासनादेश जारी करवाने के लिए राज्यपाल को ज्ञापन भेजा है और आशा की कि राज्यपाल की ओर से शिक्षकों को न्याय मिलेगा।

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महापौर के सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल करने पर आरओ से शिकायत

रुड़की: गीतांजलि विहार रुड़की निवासी आरटीआइ कार्यकत्र्ता अमित अग्रवाल ने रुड़की के निर्वाचन अधिकारी को बताया कि आठ जनवरी से आचार संहिता लागू हो चुकी है। बावजूद इसके रुड़की के महापौर सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं। गाड़ी का इस्तेमाल निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है, जो आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। उन्होंने मांग उठाई इस मामले में कार्रवाई की जाए। वहीं इस संबंध में निर्वाचन अधिकारी अंशुल सिंह से संपर्क किया गया लेकिन उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हो सका।

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Edited By: Sumit Kumar