राज्य ब्यूरो, देहरादून। करीब तीन साल से पाठ्यपुस्तकों से वंचित करीब साढ़े पांच लाख छात्र-छात्राओं के बारे में सरकार संजीदा हुई है। कोरोनाकाल में स्कूल बंद रहने से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी पाठ्यपुस्तकों से वंचित रह गए। ये हाल तब रहा, जब छात्रों के खातों में पैसे पहुंचे, लेकिन पाठ्यपुस्तकें खरीदने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए गए। अब यह जिम्मा स्कूल प्रबंधन समितियों को सौंपा गया है।

दरअसल, कक्षा एक से आठवीं तक प्रदेश सरकार के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं के बच्चों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें मुहैया कराई जाती हैं। इसके अतिरिक्त नौवीं से 12वीं तक समस्त छात्राओं के साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के छात्रों को मुफ्त किताबें सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाती हैं। पिछले तीन वर्षों से छात्र-छात्राओं को पाठ्यपुस्तकें नहीं मिलीं, अलबत्ता उनके खातों में पुस्तकों की राशि पहुंचाई गई।

इस संबंध में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि पुस्तकें छात्र-छात्राओं तक पहुंचे इसके लिए शासनादेश जारी किया गया है। साथ में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्कूल प्रबंधन समितियों के माध्यम से पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के साथ ही सहायताप्राप्त शिक्षण संस्थाओं में स्कूल प्रबंधन समितियां गठित हैं। इन समितियों के माध्यम से अभिभावकों से संपर्क कर छात्र-छात्राओं को हरहालत में पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि उन्हें पढ़ाई में नुकसान न उठाना पड़े।

कक्षा एक से पांचवीं तक पुस्तक के लिए प्रत्येक छात्र को 250 रुपये, कक्षा छह से आठवीं तक 400 रुपये और नौवीं से दसवीं तक 600 रुपये दिए जाते हैं। 11वीं व 12वीं में विज्ञान वर्ग के छात्रों के लिए 1000 रुपये और अन्य विषयों के छात्रों को 700 रुपये पुस्तकों के लिए दिए जाते हैं। पुस्तकों की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजना के जरिये सीधे उनके बैंक खातों तक पहुंचाई गई है।

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Edited By: Sunil Negi