देहरादून यूसीबी बैंक घोटाला: 9000 ग्राहक परेशान, सीएम धामी से सीबीआई जांच की मांग
आरबीआई ने अर्बन कोओपरेटिव बैंक (यूसीबी) पर वित्तीय अनियमितताओं के चलते छह माह का प्रतिबंध लगाया है, जिससे 9000 ग्राहक ...और पढ़ें

बैंक के खाताधारकों ने ऋण बांटने में की गई अनियमितता के मामले में सीबीसीआइडी जांच की उठाई मांग। प्रतीकात्मक

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जागरण संवाददाता, देहरादून। गंभीर वित्तीय अनियमितता पकड़ में आने के बाद अर्बन कोओपरेटिव बैंक (यूसीबी) लि. पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) छह माह का प्रतिबंध लगा चुका है। बैंक से नकदी की निकासी पर भी रोक लग जाने से करीब 09 हजार ग्राहक परेशान हैं। बुधवार को खाताधारकों ने उत्तरांचल प्रेस क्लब में मीडिया के समक्ष अपनी पीड़ा बयां की और बैंक प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए।
पत्रकारों से मुखातिब खाताधारक अचिन गुप्ता ने कहा कि अर्बन कोओपरेटिव बैंक के पास ग्राहकों के 124 करोड़ रुपए से अधिक जमा हैं। लेकिन, फिलहाल उनकी रकम वापसी की कोई सूरत नजर नहीं आ रही।
उन्होंने कहा कि बैंक प्रबंधन ने जिस तरह वर्ष 2013-14 और इसके आसपास 35 से 38 बैकहो लोडर (जेसीबी की मशीन) खरीद के लिए चाहतों को ऋण दिए, वह स्पष्ट घपले को बयां करता है। क्योंकि इनमें से किसी भी ऋण की अदायगी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि ऋण बांटने में बरती गई अनियमित बैंक की मुख्यालय की क्रास रोड शाखा से अधिक सहस्रधारा रोड की शाखा में सामने आए हैं। क्योंकि, वह शाखा निगाह से दूर रहती है।
वहीं, कांट्रेक्टर एसोसिएशन नगर निगम मुकेश शर्मा ने कहा कि एनपीए घोषित किए जा चुके ऐसे ऋण की राशि करीब 38 करोड़ रुपए हो चुकी है, लेकिन बैंक प्रबंधन ने इसकी प्रोविजनिंग नहीं की। साथ ही बैंक के घाटे में आने के बावजूद फायदा दिखाया जाता रहा।
खातेदार रजत अग्रवाल ने बैंक घोटाले को लेकर आरबीआइ की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब बैंक घाटे के बावजूद फायदा दिखा रहा था तो इतने साल यह मामला आरबीआइ क्यों नहीं पकड़ पाया। खाताधारकों ने मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री से मांग उठाई कि बैंक घोटाले की सीबीआइ जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। अन्यथा सभी खातेदार सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
पत्रकार वार्ता में जितेंद्र कोटनाला, एहसान अली, नरेश थापा, अशोक शर्मा, नरेंद्र बत्रा, संजय, जितेंद्र, राजकुमार आदि शामिल रहे।
बैंक चेयरमैन ने अधिकारियों पर मढ़ा दोष
अर्बन कोओपरेटिव बैंक (यूसीबी) के खातेदार बुधवार दोपहर को चेयरमैन मयंक ममगाईं से मिले। दौरान खाताधारकों ने बैंक में किए गए घपले को लेकर नाराजगी जाहिर। बैंक के चेयरमैन मयंक ममगाईं ने कहा कि उनके स्तर से कोई गड़बड़ी नहीं की गई है। जो भी गड़बड़ की गई है, वह अधिकारियों के स्तर से की गई है। आरबीआइ मामले की जांच कर रहा है और बैंक ने भी आंतरिक जांच शुरू की है।
हालांकि, खातेदारों ने सवाल किए कि करोड़ों रुपए के ऋण का मामला एकतरफा अधिकारियों की जिम्मेदारी पर कैसे छोड़ा जा सकता है। इस तरह के ऋण में चेयरमैन की सहमति भी जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि पूर्व चेयरमैन रमेश ममगाईं के कार्यकाल में यह गड़बड़ी की गई और मौजूदा चेयरमैन ने गड़बड़ी को नजर अंदाज किया।
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