देहरादून, जेएनएन। ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने ही निगम को लाखों का चूना लगाया। 20.21 करोड़ से अधिक का डिमांड ड्राफ्ट तकरीबन तीन माह तक बैंक में जमा नहीं किया। इससे ऊर्जा निगम को दोहरा घाटा हुआ। एक, इस रकम पर मिलने वाला लाखों रुपये ब्याज नहीं मिला। दूसरा, देनदारी चुकता करने को इतनी ही रकम का ओवर ड्राफ्ट कर ब्याज देना पड़ा। दो अरब से ज्यादा का नुकसान झेल रहे ऊर्जा निगम का डिमांड ड्राफ्ट बैंक में नहीं लगाना अधिकारियों को सवालों के घेरे में खड़ा करता है। 

प्रदेश में रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड केबिल बिछाने का काम कर रहा है। जियो अपनी केबिल ओवर हेड बिजली के पोल के जरिये बिछा रहा है। इस बाबत जियो का यूपीसीएल के साथ 20 करोड़ 21 लाख 30 हजार रुपये में करार हुआ। जियो ने 18 अप्रैल 2019 को इस रकम का डिमांड ड्राफ्ट यूपीसीएल को सौंप दिया। घाटे से जूझ रहे यूपीसीएल ने तकरीबन तीन महीने तक इस डिमांड ड्राफ्ट को बैंक में नहीं लगाया। 

इससे मिलने वाले 25-30 लाख रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ। वहीं शासन को इलेक्ट्रॉनिक ड्यूटी का भुगतान करने के लिए ऊर्जा निगम ने अप्रैल में ही 50 करोड़ का ओवर ड्राफ्ट किया। इसमें ब्याज का भुगतान करना पड़ा। इस तरह ऊर्जा निगम को दोगुना नुकसान हुआ। इसका खुलासा एक सूचना के अधिकार में हुआ है। 

पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्र ने बताया कि रिलायंस जियो के साथ एग्रीमेंट की शर्तों का अध्ययन किया जा रहा था। रिलायंस ने कहा, कि वह पांच साल बाद कोई पैसा जमा नहीं कराएगा, जबकि कॉरपोरेशन दोबारा धन जमा कराने को कह रहा था। इसी को लेकर मंथन चल रहा था, इस कारण से ड्राफ्ट बैंक में क्लीयरेंस के लिए नहीं लगाया गया। 

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Posted By: Raksha Panthari

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