देहरादून। 18 मार्च 2017 को प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। पहली बार राज्य में स्थायित्व की मजबूत बुनियाद पर बैठी सरकार ने जन आकांक्षाओं के अंबार की चुनौती से निपटने के लिए मजबूत फैसले लिए।

चार धामों समेत तमाम राज्य के प्रमुख मंदिरों के लिए देवस्थानम चारधाम प्रबंधन बोर्ड का गठन हो या गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने जैसे अहम फैसले लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने विरोधियों को भी चौंकाया। सरकार के तीन साल का सफर पूरा होने के मौके पर 'दैनिक जागरण' से रविंद्र बड़थ्वाल ने आत्मविश्वास से लबरेज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। पेश हैं इसके मुख्य अंश-

सवालः सरकार का तीन सरकार का कार्यकाल पूरा हो चुका है, उपलब्धियों के मोर्चे पर सरकार खुद को कहां खड़ा पा रही है।  

जवाब: भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन, स्वस्थ व खुशहाल उत्तराखंड और संतुष्ट अन्नदाता और रूरल कनेक्टिविटी सरकार की प्राथमिकता रही। भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश रखने में सरकार को कामयाब मिली है। पहले जनता का पैसा कुछ लोगों की जेब में चला जाता था। अब ऐसा नहीं है। ईमानदारी से काम होने की वजह से निर्माण कार्यों की लागत में कमी आई है। 

मोहकमपुर फ्लाईओवर में सरकार ने 30 करोड़ रुपये बचाए। सूर्यधार परियोजना की लागत 56 करोड़ से घटकर 28 करोड़ हो गई है। मोहंड में डॉट काली टनल को समय से पहले पूरा कर सरकार ने पैसा बचाया है। सचिवालय में चतुर्थ तल (मुख्यमंत्री कार्यालय) को दलालों और माफिया से मुक्ति मिली है। 

सरकार ने रूरल कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी। इस कार्य में उत्तराखंड देश में अव्वल रहा। रूरल कनेक्टिविटी में राज्य को 17 अवार्ड केंद्र से मिले हैं। 2022 तक सभी गांवों को सड़क से जोडऩे का लक्ष्य है। 15.09 लाख परिवारों को 'हर घर को नल से जल' योजना का लाभ मिलेगा। 

सरकार अन्नदाता किसान की खुशहाली चाहती है। व्यक्तिगत रूप से बगैर ब्याज एक लाख रुपये और समूह में पांच लाख तक ऋण देने से उनकी सहूलियतों में इजाफा हुआ है। राज्य में प्रति व्यक्ति आय में जो वृद्धि हुई है, उसमें अब किसान भी शामिल है।

अटल आयुष्मान योजना ने सेहत को लेकर आम आदमी की चिंता को दूर किया है। जन स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यह सार्वभौमिक योजना गेमचेंजर है। 108 आपातकालीन सेवा में 139 नए वाहनों का बेड़ा है। 13 में से नौ जिलों में आइसीयू बन चुके हैं। जिला अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव में वृद्धि हो रही है, ऑपरेशन भी होने लगे हैं। 

सवालःविषम भूगोल वाले इस राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एक बड़ी चुनौती रही है? 

जवाब: राज्य में पहली बार चिकित्सकों की संख्या बढ़ रही है। आज चिकित्सकों की संख्या करीब 2100 है। 325 चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इस साल चिकित्सकों की संख्या 2700 तक पहुंच जाएगी। ऐसा पहली बार होगा, जब कुल स्वीकृत पदों के बराबर चिकित्सक होंगे। राज्य में पांच लोकसभा क्षेत्र हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या पांच है। 

इनमें तीन क्रियाशील हैं, जबकि रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज के लिए पैसा केंद्र से मंजूर हो चुका है। पिथौरागढ़ को जल्द पैसा मंजूर होने की उम्मीद है। मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, बाल मृत्यु दर में सुधार स्वस्थ राज्य की ओर बढऩे का स्पष्ट संकेत है। जो लिंगानुपात गड़बड़ा गया था, उसमें भी सुधार है। 

सवालः पर्वतीय क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विषमता है, तेजी से पलायन जारी है। कैसे लगेगा विराम।

जवाब: पर्वतीय क्षेत्रों में जब तक पूंजी निवेश नहीं होगा, रोजगार और विकास के नए मौके सामने नहीं आएंगे। इन्वेस्टर समिट में एक लाख करोड़ से ज्यादा पूंजी निवेश के प्रस्तावों में 40 हजार करोड़ पर्वतीय क्षेत्रों के लिए हैं। इसके मद्देनजर भूमि कानून में सुधार किया है। 670 न्याय पंचायतों में ग्रोथ सेंटर, जैविक खेती को बढ़ावा देने को 3899 जैविक क्लस्टरों में काम शुरू, होम स्टे, 13 जिलों में 13 नए डेस्टीनेशन पर्वतीय क्षेत्रों विकास की नई मजबूत बुनियाद रखने जा रही है। ऑलवेदर रोड, भारतमाला प्रोजेक्ट और ऋषिकेश-कर्णप्रयागरेल प्रोजेक्ट गेमचेंजर बनने जा रही है। पलायन रोकने और रिवर्स पलायन के लिए सरकार योजनाबद्ध तरीके से कदम बढ़ा रही है। 

सवालः पहली बार किसी सरकार के पास प्रचंड बहुमत, 57 विधायकों के नेता विधानमंडल के रूप में खुद को कितना संतुष्ट पाते हैं।

जवाब: भ्रष्टाचार पर सरकार का सख्त रुख हो या मजबूती के साथ राज्य हित में फैसले, इसके पीछे सभी विधायक साथियों और टीम की ताकत ही है। जनाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सिर्फ फैसलों से काम नहीं चलने वाला। इन पर दृढ़ता से अमल करना जरूरी है। अभी पूर्ण संतुष्टि जैसी बात नहीं, लेकिन फैसलों पर अमल होने से कुछ संतोष जरूर होता है। चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम ऐसा ही फैसला है।

सवालः मंत्रिमंडल के रिक्त पद कब तक भरे जाएंगे।

जवाब: यह कार्य जब भी होगा, आपको पता चल जाएगा। इसकी समय सीमा तय करना ठीक नहीं है। एक बात तय है कि इससे जनता का कोई काम प्रभावित नहीं हो रहा।

सवालः खैरासैंण के बेटे से जनता की उम्मीदें बहुत हैं, लेकिन बेटे की खुद की बड़ी तमन्ना क्या है।

जवाब: पहाड़ों में मां-बहनों के सिर पर अब भी घास के गट्ठर का भारी बोझ है। ये टीस सालती है। घास-चारे के इंतजाम के लिए पेड़ों, चट्टानों से गिरने और भालू-गुलदार जैसे जंगली जानवरों के हमले झेलने को वे मजबूर हैं। पानी और ईंधन को लेकर बोझ दूर हो चुका है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का बहुत आभार। चारे की समस्या का समाधान करना है। रानीपोखरी में कॉम्पेक्ट चारा तैयार करने जैसे कदम उठे हैं। 

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सवालः गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के फैसले के बाद सरकार का अगला कदम क्या है।

जवाब: आने वाले दो सालों में उत्तराखंड में गैरसैंण की भावना को साकार होता देखा जा सकेगा। राज्य आंदोलनकारियों की भावना के साथ ही पहाड़ के लोगों की विकास की आकांक्षा को मूर्त रूप दिया जाएगा। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाना भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में है। गैरसैंण समेत घोषणापत्र के 70 फीसद वायदों को सरकार ने पूरा किया है।

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Posted By: Bhanu Prakash Sharma

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