दो नदियों के संगम पर बसा उत्तराखंड का ये गुप्त शहर, पैराग्लाइडिंग और ट्रैकिंग के शौकीनों का लग रहा मेला!
सतपुली, पौड़ी जिले में नयार नदियों के संगम पर बसा एक महत्वपूर्ण पर्वतीय नगर है, जो गढ़वाल का प्रमुख व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र है।
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HighLights
नयार नदियों के संगम पर स्थित, गढ़वाल का केंद्रीय जंक्शन।
पैराग्लाइडिंग, ट्रेकिंग और साहसिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र।
चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा ऐतिहासिक दुगड्डा भी पास।
दिनेश कुकरेती, देहरादून। चलिए! आपको उत्तराखंड के पौड़ी जिले में स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण, ऐतिहासिक एवं तेजी से उभरते नगर सतपुली की सैर कराते हैं। गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार से महज 50 किमी की दूरी पर स्थित सतपुली एक सुंदर पर्वतीय नगर तो है ही, गढ़वाल मंडल का प्रमुख व्यापारिक एवं सांस्कृतिक केंद्र भी है।
समुद्रतल से 2,200 फीट की ऊंचाई पर पूर्वी नयार और पश्चिमी नयार नदी के संगम के पास बसे इस नगर को कोटद्वार और जिला मुख्यालय पौड़ी के केंद्र में होने के गढ़वाल का केंद्रीय जंक्शन भी कहा जाता है। अब यहां नयार नदी पर कृत्रिम झील का निर्माण हो रहा है, जिससे यह नगर पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन जाएगा।
हाल ही में सतपुली के पास भिताड़ा और गढ़कोट गांव के पास पहाड़ों में चूना पत्थर की कुछ प्राकृतिक गुफाएं भी मिली हैं, जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। सतपुली से आठ किमी की दूरी पर स्थित बांघाट कस्बा नदी किनारे समय बिताने और पैराग्लाइडिंग व ट्रेकिंग जैसी साहसिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
देश-विदेश के पायलट लेते हैं हिस्सा
हर साल यहां नयार वैली एडवेंचर फेस्टिवल का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश के पायलट हिस्सा लेते हैं। एक दौर में बांघाट न सिर्फ बदरी-केदार यात्रा, बल्कि ढाकरियों (पैदल सामान ढोने वाले) के ठहरने का भी प्रमुख पड़ाव हुआ करता था।
यहीं से रास्ते अलग-अलग दिशाओं के लिए संपूर्ण गढ़वाल से तिब्बत तक जाया करते थे। यहां से पर्यटन नगर पौड़ी, व्यासचट्टी व ऋषिकेश के लिए भी रास्ता जाता है। सतपुली से आप पर्यटन स्थल पौड़ी, लैंसडौन, खिर्सू, पैठाणी व थलीसैण की सैर भी कर सकते हैं।
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पौड़ी: सतपुली से 52 किमी की दूरी पर पौड़ी नगर एक खूबसूरत हिल स्टेशन होने के साथ गढ़वाल जिला व गढ़वाल मंडल का मुख्यालय है। समुद्रतल से 5,500 से 8,000 फीट तक की ऊंचाई पर स्थित इस नगर से हिमाच्छादित शिखरों की लगभग 320 किमी लंबी शृंखला का दीदार होता है।
लैंसडौन: आप सतपुली से ट्रेकिंग कर पर्यटन नगरी लैंसडौन की सैर भी कर सकते हैं। सड़क मार्ग से इसकी दूरी 30 किमी है। समुद्रतल से 5,838 फीट की ऊंचाई पर देवदार और चीड़ के जंगल से घिरे इस बेहद शांत एवं खूबसूरत नगर एक बेहतरीन व्यूप्वाइंट है। आप चाहें तो सतपुली से 90 किमी दूर पैठाणी स्थित राहु मंदिर की सैर भी कर सकते हैं। पौड़ी जिले के थलीसैण ब्लाक की कंडारस्यूं पट्टी में स्योलीगाड व नावालिका नदी के संगम पर स्थित यह मंदिर अपने अनुपम वास्तु के लिए प्रसिद्ध है।

खिर्सू: यहां से 60 किमी की दूरी पर एक ग्रामीण परिवेश वाला हिल स्टेशन खिर्सू (5576 फीट) पड़ता है। बांज, देवदार, चीड़ और बुरांश के पेड़ तपिशभरी गर्मी में यहां के मौसम को खुशनुमा बनाते हैं।
दुगड़्डा: कोटद्वार से महज 15 किमी की दूरी पर सतपुली से पहले ऐतिहासिक नगर दुगड्डा पर्यटकों का स्वागत करता है। यहां वर्ष 1930 में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने दुगड्डा के जंगल में अपने साथियों को हथियार चलाने और निशानेबाजी की ट्रेनिंग दी थी। तब आजाद अपने साथी क्रांतिकारी भवानी सिंह रावत के आग्रह अपने कुछ चुनिंदा साथियों के साथ दुगड्डा आए थे।
ऐसे पहुंचें
दिल्ली समेत अन्य स्थानों से सतपुली पहुंचने के लिए कोटद्वार से 50 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। कोटद्वार तक रेल सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा जौलीग्रांट स्थित देहरादून एयरपोर्ट पहुंचकर बस-टैक्सी से भी कोटद्वार पहुंच सकते हैं। सतपुली से गढ़वाल के हर स्थान के लिए सार्वजनिक व बुकिंग पर वाहन मिल जाते हैं।
रहने-खाने के पर्याप्त इंतजाम
सतपुली में रहने-खाने के पर्याप्त संख्या में होटल व होमस्टे उपलब्ध हैं। होमस्टे में आप पारंपरिक व्यंजनों का आनंद भी ले सकते हैं।
