Dehradun: सैटेलाइट सर्वे में सामने आई सरकारी जमीनों की वास्तविक तस्वीर, कब्जे की भेंट चढ़ी भूमि
उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के सैटेलाइट सर्वे में देहरादून नगर निगम क्षेत्र में सरकारी जमीनों की विस्तृत जानकारी मिली है। नदी क्षेत्रों, बंजर भूमि और वन क्षेत्रों का सटीक विवरण दिया गया है। कई ऐसी जमीनें चिह्नित हुई हैं जिन पर कब्जे की आशंका है। नगर निगम अब इन जमीनों के लिए लैंड बैंक बनाएगा और अवैध कब्जों को हटाएगा। इससे विकास योजनाओं को गति मिलेगी।

यूसैक की ओर से किए गए सरकारी जमीनों के सेटेलाइट सर्वे में ली गई तस्वीर। साभार- आयोजक
विजय जोशी, जागरण देहरादून: उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) की ओर से किए गए गोपनीय सैटेलाइट सर्वे ने देहरादून नगर निगम क्षेत्र में सरकारी भूमि की अब तक की सबसे सटीक और विस्तृत तस्वीर सामने ला दी है।
नदी क्षेत्रों, ढांग, खाले से लेकर बंजर और जंगल-झाड़ी श्रेणी की भूमि तक का दायरा स्पष्ट हो गया है। सर्वे में ऐसी तमाम जमीनें चिह्नित हुई हैं जिन पर या तो कब्जे की आशंका है या वर्षों से कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं था। अब नगर निगम इन जमीनों को सुरक्षित करने के लिए लैंड बैंक तैयार करेगा। साथ ही कब्जे की भेंट चढ़ी जमीनों को भी छुड़ाया जाएगा।
दरअसल, नगर निगम की ओर से यूसैक के साथ सर्वे को लेकर अनुबंध किया गया था। जिस पर यह सर्वे नगर निगम के सभी 100 वार्डों के साथ-साथ सीमा विस्तार में शामिल 72 गांवों में किया गया। सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर तैयार रिपोर्ट अब नगर निगम के भूमि अनुभाग को सौंपी जा चुकी है, जिसके बाद मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन (ग्राउंड वेरिफिकेशन) शुरू होगा।
इसी के आधार पर देहरादून का पहला पारदर्शी लैंड बैंक तैयार किया जाएगा। यूसैक ने यह सर्वे लगभग कुछ महीने पहले अत्यंत गोपनीय तरीके से पूरा किया।
बिना किसी पूर्व सूचना के किए गए इस सर्वे में नदी श्रेणी की भूमि, ढांग (पहाड़ी ढलान), खाले क्षेत्र, बंजर और जंगल-जाड़ी जमीनें, खाली और कब्जा-मुक्त भूमि सभी को कैटेगरी-वाइज रिकार्ड किया गया है। यूसैक की रिपोर्ट में प्रत्येक भू-भाग का सटीक लोकेशन, ज़मीन का प्रकार और संभावित उपयोग तक का विवरण मौजूद है।
अब नगर निगम की टीम उनकी भौतिक जांच कर अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी।
लैंड बैंक’से नगर निगम की योजनाओं में आएगी तेजी
नगर निगम देहरादून पहली बार एक आधिकारिक लैंड बैंक तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि शहर में चल रही सरकारी योजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान की जा सके। भविष्य में विकास परियोजनाओं को जमीन न मिलने की समस्या खत्म हो।
नगर निगम के प्रस्तावित 25 वेंडिंग ज़ोन समेत पार्क निर्माण आदि अन्य विकास योजनाओं को वास्तविक धरातल पर उतारने में तेजी आए और कब्जे और अवैध निर्माण पर कार्रवाई में आसानी हो। अभी तक नगर निगम के पास कई जगहों की जमीनों का सही रिकार्ड नहीं था, जिस कारण वर्षो से कई योजनाएं अटकी हुई थीं।
सैटेलाइट इमेज में साफ, कहां कितनी जमीन खाली और कहां कब्जा
यूसैक सर्वे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सैटेलाइट इमेज में प्रत्येक भूखंड की सीमा, उस पर हुए संभावित कब्जे, कौन-सी जमीन सरकारी है और कौन-सी नहीं, किस जमीन का क्या प्राकृतिक स्वरूप है और भविष्य में किस भूमि का किस तरह उपयोग संभव है यह सब हाई-रेजोल्यूशन चित्रों में उपलब्ध है।
डालनवाला में ही मिली 48 हेक्टेयर सरकारी जमीन
सैटेलाइट सर्वे की सबसे उल्लेखनीय खोजों में से एक है डालनवाला क्षेत्र, जहां अकेले 48 हेक्टेयर से अधिक सरकारी भूमि चिहि्नत हुई है। डालनवाला के मोहिनी रोड, इंदर रोड, चंदर रोड, तेगबहादुर रोड और बलवीर रोड जैसे इलाकों में भी जमीनें सामने आई हैं, जिन पर नगर निगम अब अलग से जांच करेगा। सर्वे में आरकेडिया क्षेत्र में नगर निगम की 6.790 हेक्टेयर जमीन पाई गई। नगर निगम सीमा विस्तार के बाद निगम में शामिल मोथरोवाला में ही नदी श्रेणी में ही 43.57 हेक्टेयर जमीन है। इधर, कुठाल गांव में 2.90 हेक्टेयर जमीन निकली है।नकरौंदा में 4.83 हेक्टेयर जमीन, डांडा लखौंड वार्ड में 0.1940 हैक्टेयर जमीन स्थित पाई गई।
अतिक्रमण पर नजर के साथ ही पुराने कब्जों पर कार्रवाई के लिए यूसैक की ओर से दी गई सर्वे रिपोर्ट बेहद कारगर साबित हाेगी। नए इलाकों में ग्राम समाज की भूमि नगर निगम में शामिल होने के बाद से कोई स्पष्ट रिकार्ड नहीं था। अब लैंड बैंक तैयार किया जा रहा है, जिसमें हर श्रेणी की सरकारी भूमि का डाटा उपलब्ध होगा।

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